NCERT समाधान कक्षा 9 संस्कृत शारदा अध्याय 4 (चतुर्थः पाठः) “न खलु वयस्तेजसो हेतुः” के प्रश्न-उत्तर, हिन्दी अनुवाद, शब्दार्थ, भावार्थ, सारांश, व्याकरण अभ्यास तथा अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर यहाँ सरल एवं परीक्षा-उपयोगी भाषा में दिए गए हैं। यह पाठ भारत के अमर क्रान्तिवीर खुदीराम बोस के अद्भुत साहस, देशभक्ति, त्याग और बलिदान पर आधारित है। पाठ का मुख्य संदेश है कि किसी व्यक्ति की महानता उसकी आयु से नहीं, बल्कि उसके तेज, साहस, संकल्प, चरित्र और कर्मों से आँकी जाती है। कम आयु में भी यदि व्यक्ति राष्ट्र, समाज और मानवता के लिए महान कार्य करता है, तो वह सदैव इतिहास में अमर हो जाता है। यह पाठ विद्यार्थियों में देशप्रेम, निर्भीकता, आत्मविश्वास तथा राष्ट्रसेवा की प्रेरणा उत्पन्न करता है।
Quick Links
1. पाठ परिचय
2. अध्याय की संपूर्ण व्याख्या व हिंदी अनुवाद
3. अध्याय प्रश्न उत्तर (will be upload shortly)
4. Exam Tips to Avoid Mistakes
5. Very Short Question and Answer
6. Short Question and Answer
पाठ-परिचय (Chapter Introduction):
यह पाठ देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले दो अमर वीर बालकों—खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी के अदम्य साहस को समर्पित है। पाठ का शीर्षक स्पष्ट करता है कि वीरता या पराक्रम दिखाने के लिए आयु (उम्र) कोई बाधा नहीं होती। मात्र पंद्रह-सोलह वर्ष की अल्पायु में इन वीरों ने क्रूर अंग्रेज अधिकारी किंग्सफोर्ड को दंडित करने की सूक्ष्मा योजना बनाई। पकड़े जाने पर वीर प्रफुल्ल ने स्वयं को गोली मार ली और खुदीराम हँसते-हँसते ‘वन्दे मातरम्’ का जाप करते हुए फाँसी पर झूल गए। यह पाठ छात्रों में राष्ट्रप्रेम, अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।
अध्याय की संपूर्ण व्याख्या व हिंदी अनुवाद
न खलु वयस्तेजसो हेतुः
भारतदेशस्य स्वतन्त्रतायाः अमृतमहोत्सववर्ष वयम् आचरितवन्तः । किं वयं जानीमः यत् देशाय स्वातन्त्र्यं प्रदातुं कियन्तः ज्ञाताः अज्ञाताः च क्रान्तिवीराः स्वतन्त्रतायज्ञे स्वीयपरिवारं स्वीयजीवनं च आहुतिरूपेण समर्पितवन्तः इति ?
सरल भाव: वास्तव में प्रतिभा या पराक्रम का कारण उम्र नहीं होती है। हम सबने भारत देश की स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव वर्ष मनाया है। क्या हम जानते हैं कि देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए कितने ही ज्ञात और अज्ञात क्रान्तिकारी वीरों ने स्वतंत्रता के इस यज्ञ में अपने परिवार और अपने जीवन की आहुति दे दी?
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| न खलु — निश्चित ही नहीं | वयस्तेजसो — उम्र तेज का |
| हेतुः — कारण होता है | भारतदेशस्य — भारत देश की |
| स्वतन्त्रतायाः — स्वतंत्रता का | अमृतमहोत्सववर्ष — अमृत महोत्सव वर्ष |
| वयम् — हम सबने | आचरितवन्तः — मनाया है |
| किं वयं जानीमः — क्या हम जानते हैं | यत् — कि |
| देशाय — देश के लिए | स्वातन्त्र्यं — स्वतंत्रता |
| प्रदातुं — दिलाने/देने के लिए | कियन्तः — कितने ही |
| ज्ञाताः अज्ञाताः च — ज्ञात और अज्ञात | क्रान्तिवीराः — क्रान्तिकारी वीरों ने |
| स्वतन्त्रतायज्ञे — स्वतंत्रता रूपी यज्ञ में | स्वीयपरिवारं — अपने परिवार को |
| स्वीयजीवनं च — और अपने जीवन को | आहुतिरूपेण — आहुति के रूप में (बलिदान स्वरूप) |
| समर्पितवन्तः इति — समर्पित कर दिया? |
छात्राः ! ते सर्वेऽपि क्रान्तिवीराः अस्माभिः कृतज्ञताभावनया नित्यं वन्दनीयाः । खुदीरामः तेषु एव देशभक्तेषु कश्चन तेजस्वी बालक्रान्तिवीरः हुतात्मा अस्ति। क्रान्तिवीरस्य खुदीरामवृतान्तः संक्षेपेण अत्र वर्णितः अस्ति।
सरल भाव: छात्रों! वे सभी क्रान्तिकारी वीर हमारे द्वारा कृतज्ञता (आभार) की भावना से रोज़ वंदनीय हैं (नमन करने योग्य हैं)। खुदीराम बोस उन्हीं देशभक्तों में से एक तेजस्वी बाल क्रान्तिकारी वीर शहीद हैं। क्रान्तिवीर खुदीराम का वृत्तांत (इतिहास) संक्षेप में यहाँ वर्णित है।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| ते सर्वेऽपि — वे सभी भी (ते + सर्वे + अपि) | क्रान्तिवीराः — क्रान्तिकारी वीर |
| अस्माभिः — हमारे द्वारा | कृतज्ञताभावनया — कृतज्ञता की भावना से |
| वन्दनीयाः — वंदनीय हैं (नमन करने योग्य हैं) | तेषु एव — उन्हीं में ही |
| देशभक्तेषु — देशभक्तों में | कश्चन — कोई एक |
| बालक्रान्तिवीरः — बाल क्रान्तिकारी वीर | हुतात्मा अस्ति — शहीद हैं |
| क्रान्तिवीरस्य — क्रान्तिवीर का | खुदीरामवृतान्तः — खुदीराम का वृत्तांत/इतिहास |
भारतस्य स्वतन्त्रतासङ्ग्रामे सशस्त्रान्दोलने बङ्गप्रान्तः अग्रेसरः आसीत्। तस्मिन् बङ्गप्रान्ते मेदिनीपुरनामके जनपदे मोहोबनी-ग्रामे नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमे वर्षे (१८८९) दिसम्बरमासस्य तृतीये दिनाङ्के खुदीरामस्य जन्म अभवत् । तस्य जनकस्य नाम त्रैलोक्यनाथः इति, जनन्याः नाम लक्ष्मीप्रिया देवी च आसीत्।
सरल भाव: भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सशस्त्र आंदोलन में बंगाल प्रांत सबसे आगे था। उसी बंगाल प्रांत के मेदिनीपुर नामक जिले के मोहोबनी गाँव में सन् १८८९ (1889) में दिसंबर महीने की तीन तारीख को खुदीराम का जन्म हुआ था। उनके पिता का नाम त्रैलोक्यनाथ और माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| भारतस्य — भारत के | स्वतन्त्रतासङ्ग्रामे — स्वतंत्रता संग्राम में |
| सशस्त्रान्दोलने — सशस्त्र आंदोलन में | बङ्गप्रान्तः — बंगाल प्रांत (राज्य) |
| अग्रेसरः आसीत् — सबसे आगे था | तस्मिन् — उस |
| बङ्गप्रान्ते — बंगाल प्रांत में | मेदिनीपुरनामके — मेदिनीपुर नामक |
| जनपदे — जिले में | मोहोबनी-ग्रामे — मोहोबनी गाँव में |
| नवाशीत्यधिक-अष्टादशशततमे वर्षे — अठारह सौ नवासी (1889) वर्ष में | दिसम्बरमासस्य — दिसंबर महीने की |
| तृतीये दिनाङ्के — तीसरी तारीख को | खुदीरामस्य — खुदीराम का |
| जन्म अभवत् — जन्म हुआ था | जनकस्य नाम — पिता का नाम |
| त्रैलोक्यनाथः इति — त्रैलोक्यनाथ ऐसा | जनन्याः नाम — माता का नाम |
| लक्ष्मीप्रिया देवी च आसीत् — और लक्ष्मीप्रिया देवी था |
खुदीरामस्य बाल्यकाले एव तस्य पितरौ दिवङ्गतौ। अतः तस्य अग्रजया अपरूपादेव्या एव खुदीरामस्य पालनं पोषणं च कृतम्। बाल्यकालतः एव खुदीरामः असाधारणः आसीत्। साधारणबालानाम्इ व क्रीडादिषु तस्य मनः न रमते स्म। सः देशवासिषु जायमानान् अत्याचारान् दृष्ट्वा व्यथितः भवति स्म।
सरल भाव: खुदीराम के बचपन में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया था। इसलिए उनकी बड़ी बहन अपरूपा देवी द्वारा ही खुदीराम का पालन-पोषण किया गया। बचपन से ही खुदीराम असाधारण थे। आम बच्चों की तरह खेलकूद आदि में उनका मन नहीं लगता था। वह देशवासियों पर होने वाले अत्याचारों को देखकर दुखी होते थे।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| तस्य पितरौ — उनके माता-पिता | दिवङ्गतौ — स्वर्गवासी हो गए (देहांत हो गया) |
| तस्य अग्रजया — उनकी बड़ी बहन द्वारा | अपरूपादेव्या एव — अपरूपा देवी के द्वारा ही |
| साधारणबालानाम् इव — आम बच्चों की तरह | क्रीडादिषु — खेलकूद आदि में |
| तस्य मनः — उनका मन | न रमते स्म — नहीं लगता था |
| देशवासिषु — देशवासियों पर | जायमानान् — होने वाले |
| अत्याचारान् — अत्याचारों को | दृष्ट्वा — देखकर |
| व्यथितः भवति स्म — दुखी होते थे |
बङ्गप्रान्ते क्रान्तिवीराणां महद्भिः गुप्तगतिविधिभिः आङ्ग्लाः संत्रस्ताः आसन् । भारतस्य तात्कालिकः वायसरायः कर्जनः बङ्गप्रान्तस्य एतत् वीरत्वं दमयितुम्, उत्साहं ध्वंसयितुं, देशभक्तिं मर्दयितुं च बङ्गप्रान्तस्य पन्थाधारितं विभजनं करणीयम् इति निश्चितवान्। पञ्चाधिक-नवदशशततमे वर्षे (१९०५) तेन बङ्गप्रान्तः भागद्वये विभाजितः।
सरल भाव: बंगाल प्रांत में क्रांतिकारी वीरों की बड़ी गुप्त गतिविधियों से अंग्रेज डरे हुए (परेशान) थे। भारत के तत्कालीन वायसराय कर्जन ने बंगाल प्रांत के इस वीरत्व को दबाने, उत्साह को नष्ट करने और देशभक्ति को कुचलने के लिए बंगाल प्रांत का संप्रदाय-आधारित विभाजन करने का निश्चय किया। सन् १९०५ (1905) में उसके द्वारा बंगाल प्रांत को दो भागों में विभाजित कर दिया गया।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| महद्भिः — बड़ी / बहुत अधिक | गुप्तगतिविधिभिः — गुप्त गतिविधियों से |
| आङ्ग्लाः — अंग्रेज (ब्रिटिश शासन) | संत्रस्ताः आसन् — डरे हुए / परेशान थे |
| तात्कालिकः वायसरायः — तत्कालीन वायसराय | बङ्गप्रान्तस्य — बंगाल प्रांत के |
| एतत् वीरत्वं — इस वीरत्व (वीरता) को | दमयितुम् — दबाने के लिए |
| उत्साहं ध्वंसयितुं — उत्साह को नष्ट करने के लिए | देशभक्तिं मर्दयितुं च — और देशभक्ति को कुचलने के लिए |
| पन्थाधारितं — संप्रदाय-आधारित / धर्म-आधारित | विभजनं करणीयम् — विभाजन करना चाहिए |
| इति निश्चितवान् — ऐसा निश्चय किया | पञ्चाधिक-नवदशशततमे वर्षे — (1905) वर्ष में |
| तेन — उसके द्वारा | भागद्वये — दो भागों में |
तस्य एतया कृत्या न केवलं बङ्गप्रान्ते अपि तु सर्वस्मिन् देशे जनान्दोलनं प्रवृत्तम् । बङ्गभङ्ग-आन्दोलनमिति तस्य जनान्दोलनस्य नाम। यद्यपि खुदीरामः तस्मिन् समये केवलं पञ्चदशवर्षीयः तथापि देशभक्तेः भावनया सः प्रेरितः सन् जनान्दोलने कूर्दितः। आङ्ग्लानां पारतन्त्र्यशृङ्खलातः वन्दनीयभारतमातुः मोचनं करणीयम् इत्येव
सरल भाव: उसके इस कार्य से न केवल बंगाल प्रांत में, बल्कि पूरे देश में जन-आंदोलन भड़क उठा। उस जन-आंदोलन का नाम ‘बंग-भंग आंदोलन’ (बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन) था। हालांकि खुदीराम उस समय केवल पंद्रह वर्ष के थे, फिर भी देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर वह इस जन-आंदोलन में कूद पड़े। अंग्रेजों की गुलामी की बेड़ियों से वन्दनीय भारत माता को मुक्त कराना ही—
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| तस्य — उसके | एतया कृत्या — इस कार्य/हरकत से |
| अपि तु — बल्कि | सर्वस्मिन् देशे — पूरे देश में |
| प्रवृत्तम् — शुरू हो गया / भड़क उठा | बङ्गभङ्ग-आन्दोलनमिति — बंग-भंग आंदोलन ऐसा |
| तस्य जनान्दोलनस्य — उस जन-आंदोलन का | तस्मिन् समये — उस समय |
| पञ्चदशवर्षीयः — पंद्रह वर्ष के (था) | कूर्दितः — कूद पड़े |
| आङ्ग्लानां — अंग्रेजों की | पारतन्त्र्यशृङ्खलातः — गुलामी की बेड़ियों/जंजीरों से |
| वन्दनीयभारतमातुः — वन्दनीय भारत माता को | मोचनं करणीयम् — मुक्त (आजाद) करना चाहिए |
| इत्येव — ऐसा ही (इति + एव) |
सङ्कल्पः आसीत्। अतः सः नवमीं कक्षाम् अपि पूर्णां कर्तुं न शक्तवान्। यतोहि देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति।
सरल भाव: (उनका) संकल्प था। इसलिए वह नौवीं कक्षा भी पूरी नहीं कर सके। क्योंकि देशभक्तों का जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित होता है।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| सङ्कल्पः आसीत् — संकल्प था | सः — वह (खुदीराम) |
| नवमीं कक्षाम् अपि — नौवीं कक्षा को भी | पूर्णां कर्तुं — पूरी करने में |
| न शक्तवान् — समर्थ नहीं हुए (पूरी नहीं कर सके) | यतोहि — क्योंकि |
| देशभक्तानां — देशभक्तों का | जीवनं — जीवन |
| राष्ट्राय — राष्ट्र (देश) के लिए | समर्पितं भवति — समर्पित होता है |
बालानां संघटनं कृत्वा सः पदयात्राम् आयोजयति स्म। तस्यां यात्रायां देशभक्तियुतानि गीतानि, वन्दे मातरम् चेत्यादयः घोषणाः भवन्ति स्म। सः पदयात्रामाध्यमेन लोकजागरणविषयकाणि पत्रकाणि जनेषु वितरति स्म। कदाचित् खुदीरामः पत्रकवितरणसमये आङ्ग्लानां हस्तगतः जातः। किन्तु सामर्थ्यसम्पन्नः खुदीरामः आङ्ग्लानां ताडनं कृत्वा ततः निरगच्छत् ।
सरल भाव: बच्चों का संगठन (समूह) बनाकर वह पदयात्रा आयोजित करते थे। उस यात्रा में देशभक्ति से युक्त गीत और ‘वन्दे मातरम्’ आदि नारे लगते थे। वह पदयात्रा के माध्यम से जन-जागृति से संबंधित पर्चे लोगों में बाँटते थे। कभी पर्चे बाँटने के समय खुदीराम अंग्रेजों के हाथ लग गए (पकड़े गए)। लेकिन शक्तिशाली खुदीराम अंग्रेजों की पिटाई करके वहाँ से निकल भागे।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| बालानां — बच्चों का | संघटनं कृत्वा — संगठन (टीम) बनाकर |
| पदयात्राम् — पदयात्रा (पैदल मार्च) | आयोजयति स्म — आयोजित करते थे |
| तस्यां यात्रायां — उस यात्रा में | देशभक्तियुतानि — देशभक्ति से भरे हुए |
| वन्दे मातरम् — वन्दे मातरम् | चेत्यादयः — (च + इति + आदयः = और इस प्रकार के) |
| घोषणाः भवन्ति स्म — नारे/उद्घोष होते थे | पदयात्रामाध्यमेन — पदयात्रा के माध्यम से |
| लोकजागरणविषयकाणि — जन-जागृति से संबंधित | पत्रकाणि — पत्रक (पर्चे/लीफलेट्स) |
| जनेषु — लोगों में | वितरति स्म — बाँटते थे |
| पत्रकवितरणसमये — पर्चे बाँटने के समय | आङ्ग्लानां — अंग्रेजों के |
| हस्तगतः जातः — हाथ लग गए | सामर्थ्यसम्पन्नः — शक्तिशाली/ सामर्थ्य से युक्त |
| ताडनं कृत्वा — ताड़ना करके (पिटाई करके) | ततः निरगच्छत् — वहाँ से निकल गए |
बङ्गप्रान्ते क्रान्तिवीरैः सञ्चालितानि बहूनि गुप्तमण्डलानि आङ्ग्लानां मनसि आतङ्क जनयन्ति स्म। कस्यचित् गुप्तमण्डलस्य सञ्चालकः आसीत् सत्येन्द्रनाथः । खुदीरामः स्वमित्रेण प्रफुल्लेन सह गत्वा सत्येन्द्रनाथेन अमिलत्। सत्येन्द्रनाथः उपादिशत् -“क्रान्तिकार्यं कर्तुं शरीरं वज्रसदृशं दृढं, बुद्धिः असिधारा इव तीक्ष्णा, मनः गङ्गाजलमिव निर्मलं च भवेत् इति”।
सरल भाव: बंगाल प्रांत में क्रांतिकारी वीरों द्वारा चलाई जाने वाली अनेक गुप्त समितियाँ अंग्रेजों के मन में खौफ (आतंक) पैदा करती थीं। किसी गुप्त समिति के संचालक सत्येन्द्रनाथ थे। खुदीराम अपने मित्र प्रफुल्ल के साथ जाकर सत्येन्द्रनाथ से मिले। सत्येन्द्रनाथ ने उपदेश दिया कि—”क्रांति का कार्य करने के लिए शरीर वज्र के समान मजबूत, बुद्धि तलवार की धार की तरह तेज और मन गंगाजल की तरह पवित्र होना चाहिए।”
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| सञ्चालितानि — संचालित/चलाई जाने वाली | गुप्तमण्डलानि — गुप्त संगठन |
| मनसि — मन में | आतङ्क — आतंक / खौफ |
| जनयन्ति स्म — पैदा करती थीं | कस्यचित् — किसी |
| गुप्तमण्डलस्य — गुप्त समिति के | सञ्चालकः आसीत् — संचालक थे |
| स्वमित्रेण — अपने मित्र | प्रफुल्लेन सह — प्रफुल्ल के साथ |
| गत्वा — जाकर | सत्येन्द्रनाथेन अमिलत् — सत्येन्द्रनाथ से मिले |
| उपादिशत् — उपदेश दिया | क्रान्तिकार्यं कर्तुं — क्रांति का कार्य करने के लिए |
| वज्रसदृशं दृढं — वज्र के समान मजबूत | असिधारा इव — तलवार की धार की तरह |
| गङ्गाजलमिव — गंगाजल की तरह | निर्मलं च — और पवित्र (साफ) |
| भवेत् इति — होना चाहिए, ऐसा |
तस्मात् गुप्तप्रशिक्षणकेन्द्रात् द्वाभ्याम् अष्टमासात्मकं प्रशिक्षणं प्राप्तम्। भुशुण्डिसञ्चालने अपि तौ अचिरादेव प्रवीणौ सञ्जातौ। राणाप्रतापस्य चरित्रेण प्रेरितः खुदीरामः प्रतिज्ञातवान् यत् ‘यावत् भारतम् आङ्ग्लशासनात् मुक्तं न भविष्यति तावत् पादत्राणं न धरिष्यामि‘ इति ।
सरल भाव: उस गुप्त प्रशिक्षण केंद्र से दोनों ने आठ महीने का प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) प्राप्त किया। बंदूक चलाने में भी वे दोनों बहुत जल्दी ही कुशल हो गए। महाराणा प्रताप के चरित्र से प्रेरित होकर खुदीराम ने प्रतिज्ञा की कि ‘जब तक भारत अंग्रेजी शासन से मुक्त नहीं होगा, तब तक मैं जूते (चप्पल) नहीं पहनूँगा।’
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| तस्मात् — उस | द्वाभ्याम् — दोनों के द्वारा (खुदीराम और प्रफुल्ल द्वारा) |
| अष्टमासात्मकं — आठ महीने का | प्रशिक्षणं प्राप्तम् — प्रशिक्षण प्राप्त किया गया |
| भुशुण्डिसञ्चालने अपि — बंदूक चलाने में भी (भुशुण्डि = बंदूक, सञ्चालन = चलाना) | तौ — वे दोनों |
| अचिरादेव — बहुत जल्दी ही | प्रवीणौ सञ्जातौ — निपुण हो गए |
| प्रतिज्ञातवान् यत् — प्रतिज्ञा की कि | यावत् — जब तक |
| आङ्ग्लशासनात् — अंग्रेजी शासन से | मुक्तं न भविष्यति — मुक्त/ आजाद नहीं होगा |
| तावत् — तब तक | पादत्राणं — जूते / चप्पल |
| न धरिष्यामि इति — नहीं पहनूँगा, ऐसा |
कलकत्ता-जनपदस्य मुख्यः न्यायिकः आङ्ग्लः अधिकारी ‘किङ्ग्ज़फोर्ड्’ भारतीय-देशभक्तान् अतीवकठोररीत्या दण्डयति स्म। निर्दयः सः बालान् अपि न त्यजति स्म। तस्य स्थानान्तरणं यदा मुज़फ्फरनगरे जातं तदा ‘सः हन्तव्यः‘ इति सशस्त्रक्रान्तिवीरमण्डलेन निश्चितम्। हत्यायोजनायाः सम्पूर्णम् उत्तरदायित्वं प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां स्वीकृतम्। तस्य वधस्य सूक्ष्मा योजनापि द्वाभ्यां निर्मिता।
सरल भाव: कलकत्ता जिले का मुख्य न्यायिक अंग्रेज अधिकारी ‘किंग्सफोर्ड’ भारतीय देशभक्तों को बहुत ही कठोर तरीके से सजा देता था। वह निर्दयी बच्चों को भी नहीं छोड़ता था। जब उसका ट्रांसफर मुजफ्फरपुर में हुआ, तब ‘उसे मार देना चाहिए’ ऐसा सशस्त्र क्रांतिकारी वीर संगठन द्वारा तय किया गया। हत्या की योजना की पूरी जिम्मेदारी प्रफुल्ल और खुदीराम द्वारा ली गई। उसकी हत्या की बारीक योजना भी दोनों के द्वारा बनाई गई।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| कलकत्ता-जनपदस्य — कलकत्ता जिले का | अतीवकठोररीत्या — बहुत ही कठोर तरीके से |
| दण्डयति स्म — सजा देता था | निर्दयः सः — वह निर्दयी (दयाहीन) |
| बालान् अपि — बच्चों को भी | न त्यजति स्म — नहीं छोड़ता था |
| तस्य — उसका | स्थानान्तरणं — स्थानांतरण (तबादला/ट्रांसफर) |
| यदा — जब | मुज़फ्फरनगरे जातं — मुजफ्फरपुर में हुआ |
| तदा — तब | ‘सः हन्तव्यः’ — ‘उसे मार देना चाहिए’ |
| इति — ऐसा | सशस्त्रक्रान्तिवीरमण्डलेन — सशस्त्र क्रांतिकारीवीर संगठन द्वारा |
| निश्चितम् — निश्चय किया गया | हत्यायोजनायाः — हत्या की योजना का |
| सम्पूर्णम् उत्तरदायित्वं — पूरी जिम्मेदारी (उत्तरदायित्व) | प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां — प्रफुल्ल और खुदीराम दोनों के द्वारा |
| तस्य वधस्य — उसके वध (हत्या) की | सूक्ष्मा योजनापि — बारीक योजना भी |
| द्वाभ्यां निर्मिता — दोनों के द्वारा बनाई गई |
अष्टाधिक-नवदशशततमवर्षस्य एप्रिलमासस्य अष्टाविंशे दिनाङ्के (२८-०४-१९०८) किङ्ग्ज़फोर्ड् इत्यस्य रथविशेषे प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां विस्फोटकं प्रक्षिप्तम्। महान् विस्फोटध्वनिः जातः । अग्निज्वालाः आकाशम् अस्पृशन्। ‘किङ्ग्ज़फोर्ड् हतः‘ अस्माकम् उत्तरदायित्वं पूर्णम् इति कृतार्थभावनया तौ पलायितवन्तौ।
सरल भाव: सन् १९०८ (1908) वर्ष के अप्रैल महीने की अट्ठाईस तारीख को किंग्सफोर्ड की खास बग्घी (रथ) पर प्रफुल्ल और खुदीराम द्वारा बम (विस्फोटक) फेंका गया। बहुत बड़ा धमाका हुआ। आग की लपटों ने आसमान को छू लिया। ‘किंग्सफोर्ड मारा गया, हमारा दायित्व पूरा हुआ’—इस संतुष्टि (कृतार्थता) की भावना से वे दोनों वहाँ से भाग निकले।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| अष्टाधिक-नवदशशततमवर्षस्य — (1908) वर्ष के | अष्टाविंशे दिनाङ्के —28 तारीख को |
| किङ्ग्ज़फोर्ड् इत्यस्य — किंग्सफोर्ड की | रथविशेषे — खास बग्घी / रथ पर |
| प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां — प्रफुल्ल और खुदीराम दोनों के द्वारा | प्रक्षिप्तम् — फेंका गया |
| महान् विस्फोटध्वनिः — बहुत बड़ा धमाका | जातः — हुआ |
| ‘किङ्ग्ज़फोर्ड् हतः’ — ‘किंग्सफोर्ड मारा गया’ | अस्माकम् — हमारा |
| उत्तरदायित्वं पूर्णम् — उत्तरदायित्व पूरा हुआ | इति — ऐसा / इस |
| कृतार्थभावनया — कृतार्थता की भावना से | तौ — वे दोनों |
| पलायितवन्तौ — भाग गए / नौ-दो-ग्यारह हो गए |
किन्तु हा धिक् ! यद्यपि सः किङ्ग्ज़फोर्ड् महोदयस्य रथः आसीत् तथापि तस्मिन् सः नासीदेव। केनेडीनामकस्य अधिकारिणः पत्नी पुत्री च तत्र आस्ताम्। ते मृते किन्तु किङ्ग्ज़फोर्ड् रक्षितः। आरात्रि द्वौ अपि क्रान्तिवीरौ अधावताम्। किन्तु दौर्भाग्यवशात् आङ्ग्लाः आरक्षकाः तौ अगृह्णन्।
सरल भाव: लेकिन बड़े धिक्कार और दुख की बात है! हालांकि वह गाड़ी (रथ) किंग्सफोर्ड महोदय की ही थी, फिर भी उसमें वह मौजूद ही नहीं था। कैनेडी नामक अधिकारी की पत्नी और बेटी उसमें बैठी थीं। वे दोनों मारी गईं लेकिन किंग्सफोर्ड बच गया। रात भर दोनों ही क्रांतिकारी वीर भागते रहे। लेकिन दुर्भाग्यवश अंग्रेज पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़ लिया।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| किन्तु हा धिक् ! — लेकिन हाय धिक्कार है! | किङ्ग्ज़फोर्ड् महोदयस्य — किंग्सफोर्ड महोदय का |
| रथः आसीत् — रथ (बग्घी) थी | तस्मिन् — उसमें |
| सः नासीदेव — वह था ही नहीं (न + आसीत् + एव) | केनेडीनामकस्य — कैनेडी नामक |
| अधिकारिणः — अधिकारी की | तत्र आस्ताम् — वहाँ थीं (उसमें बैठी थीं) |
| ते मृते — वे दोनों मर गईं / मारी गईं | किन्तु — लेकिन |
| किङ्ग्ज़फोर्ड् रक्षितः — किंग्सफोर्ड बच गया | आरात्रि — रात भर (पूरी रात) |
| द्वौ अपि — दोनों ही | अधावताम् — भागते रहे |
| दौर्भाग्यवशात् — दुर्भाग्यवश | आङ्ग्लाः आरक्षकाः — अंग्रेज पुलिसवालों ने |
| तौ अगृह्णन् — उन दोनों को पकड़ लिया |
वीरप्रफुल्लेन आङ्ग्लानां विरोधे कृतः प्रतीकारयत्नः व्यर्थः अभूत्। अनन्यगतिकः प्रफुल्लः भारतमातरं मनसा प्रणम्य ‘वन्दे मातरमिति‘ उद्घोष्य च स्ववक्षःस्थले भुशुण्ड्या गोलिकाप्रहारं कृतवान्। वीरबालः प्रफुल्लः हौतात्म्येन अमरः जातः ।
सरल भाव: वीर प्रफुल्ल के द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ किया गया बदला लेने (प्रतिरोध) का प्रयास बेकार हो गया। दूसरा कोई रास्ता न देख प्रफुल्ल ने मन ही मन भारत माता को प्रणाम किया और ‘वन्दे मातरम्’ का नारा लगाकर अपनी छाती पर बंदूक से गोली मार ली। वीर बालक प्रफुल्ल अपने इस बलिदान से अमर हो गए।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| वीरप्रफुल्लेन — वीर प्रफुल्ल के द्वारा | आङ्ग्लानां विरोधे — अंग्रेजों के विरोध में |
| प्रतीकारयत्नः — बदला लेने का प्रयास | व्यर्थः अभूत् — बेकार हो गया |
| अनन्यगतिकः — दूसरा कोई उपाय न होने पर | भारतमातरं — भारत माता को |
| प्रणम्य — प्रणाम करके | ‘वन्दे मातरमिति’ — ‘वन्दे मातरम्’ ऐसा |
| उद्घोष्य च — और नारा लगाकर | स्ववक्षःस्थले — अपनी छाती पर |
| भुशुण्ड्या — बंदूक से | गोलिकाप्रहारं कृतवान् — गोली मार ली |
| वीरबालः प्रफुल्लः — वीर बालक प्रफुल्ल | हौतात्म्येन — बलिदान से (शहादत से) |
| अमरः जातः — अमर हो गए |
आङ्ग्लैः गृहीतः खुदीरामः न्यायालयं नीतः। तत्र अधिवक्तॄणां प्रत्येकं प्रश्नस्य खुदीरामस्य निश्चितम् उत्तरम् आसीत् यत् ‘वन्दे मातरम्‘ इति । न्यायाधीशेन निर्दयतया बालाय खुदीरामाय मृत्युदण्डः उद्घोषितः उद्बन्धनम् इति। राष्ट्रभक्तस्य खुदीरामस्य मुखे भयं दुःखं वा नासीत् प्रत्युत प्रसन्नता, शान्तिः, तृप्तिः, तेजः च आसीत्।
सरल भाव: अंग्रेजों द्वारा पकड़े गए खुदीराम को अदालत (न्यायालय) ले जाया गया। वहाँ वकीलों के हर एक सवाल का खुदीराम का एक ही तय उत्तर था—’वन्दे मातरम्’। जज ने निर्दयता से बालक खुदीराम को फाँसी द्वारा मृत्युदंड की सजा सुना दी। देशभक्त खुदीराम के चेहरे पर कोई डर या दुख नहीं था, बल्कि इसके विपरीत प्रसन्नता, शांति, संतुष्टि और तेज था।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| गृहीतः — पकड़े गए | न्यायालयं नीतः — अदालत ले जाया गया |
| अधिवक्तॄणां — वकीलों के | प्रत्येकं प्रश्नस्य — हर एक प्रश्न का |
| खुदीरामस्य — खुदीराम का | निश्चितम् उत्तरम् आसीत् — तय उत्तर था |
| यत् — कि | न्यायाधीशेन — न्यायाधीश के द्वारा |
| बालाय खुदीरामाय — बालक खुदीराम के लिए | मृत्युदण्डः उद्घोषितः — मृत्युदंड सजा सुनाई गई |
| उद्बन्धनम् इति — फाँसी द्वारा, ऐसा | राष्ट्रभक्तस्य खुदीरामस्य — देशभक्त खुदीराम के |
| प्रत्युत — बल्कि / इसके विपरीत | तृप्तिः, तेजः च आसीत् — संतुष्टि और तेज था |
तत् दृष्ट्वा न्यायाधीशः आङ्ग्लाः अधिकारिणः चापि चकिताः। अष्टाधिक-नवदशशततमस्य वर्षस्य अगस्तमासस्य एकादशे दिनाङ्के (11.08.1908) बाल्ये वयसि एव देशस्य स्वातन्त्र्यार्थं खुदीरामः हुतात्मा जातः । प्रियभारतमातुः दर्शनार्थं सः हसन, वन्दे मातरम् इति जपन् आनन्देन दिवं गतः ।
सरल भाव: वह देखकर न्यायाधीश (जज) और अंग्रेज अधिकारी भी हैरान रह गए। सन् १९०८ (1908) वर्ष के अगस्त महीने की ग्यारह तारीख को छोटी उम्र में ही देश की आजादी के लिए खुदीराम शहीद हो गए। प्यारी भारत माता के दर्शन के लिए वह हँसते हुए, ‘वन्दे मातरम्’ का जाप करते हुए खुशी-खुशी स्वर्ग सिधार गए (फाँसी पर झूल गए)।
शब्दार्थ (Word-by-Word Meaning):
| तत् दृष्ट्वा — वह देखकर | न्यायाधीशः — न्यायाधीश (जज) |
| आङ्ग्लाः अधिकारिणः चापि — और अंग्रेज अधिकारी भी (च + अपि) | चकिताः — हैरान रह गए |
| अष्टाधिक-नवदशशततमस्य वर्षस्य — सन् उन्नीस सौ आठ (1908) वर्ष के | अगस्तमासस्य — अगस्त महीने की |
| एकादशे दिनाङ्के — ग्यारहवीं तारीख को | बाल्ये वयसि एव — छोटी उम्र में ही |
| देशस्य स्वातन्त्र्यार्थं — देश की स्वतंत्रता के लिए (आजादी के लिए) | हुतात्मा जातः — शहीद हो गए |
| प्रियभारतमातुः — प्यारी भारत माता के | दर्शनार्थं — दर्शन के लिए |
| सः हसन — वह हँसते हुए | इति जपन् — ऐसा जाप करते हुए |
| आनन्देन — आनंद (खुशी) से | दिवं गतः — स्वर्ग सिधार गए/ शहीद हो गए |
अध्याय प्रश्न उत्तर (will be upload shortly)
परीक्षा के लिए विशेष सुझाव (Exam Tips to Avoid Mistakes)
१. शीर्षक के अर्थ और संधि में भ्रम
गलती: छात्र अक्सर पाठ के शीर्षक “वयस्तेजसो” का संधि-विच्छेद करने में गलती कर देते हैं और इसका गलत अर्थ निकाल लेते हैं।
सही तरीका: उन्हें स्पष्ट समझाएँ कि यह वयः + तेजसः (विसर्ग संधि) से बना है। ‘वयः’ का अर्थ ‘आयु/उम्र’ तथा ‘तेजसः’ का अर्थ ‘तेज, पराक्रम, प्रतिभा या ओज’ है। पाठ का भाव यह है कि व्यक्ति की महानता उसकी आयु से नहीं, बल्कि उसके तेज, साहस और कर्मों से निर्धारित होती है।
२. ‘हसन्‘ और ‘जपन्‘ जैसे शतृ-प्रत्यय वाले शब्दों का गलत अर्थ
गलती: पाठ में आए “हसन्” (हँसते हुए) तथा “जपन्” (जाप करते हुए) जैसे शतृ-प्रत्यय वाले शब्दों का अर्थ छात्र सामान्य क्रिया या भूतकाल की तरह कर देते हैं।
सही तरीका: इनका अर्थ “करते हुए” के रूप में करना चाहिए। उदाहरण के लिए—”हँसते हुए फाँसी स्वीकार की”, “वन्दे मातरम् का जाप करते हुए”। इससे क्रिया की निरंतरता का भाव स्पष्ट होता है।
३. ‘हुतात्मा‘ शब्द के अर्थ में भ्रम
गलती: ‘हुतात्मा’ का अर्थ पूछे जाने पर छात्र भ्रमित हो जाते हैं।
सही तरीका: ‘हुतात्मा’ का अर्थ ‘शहीद’, ‘बलिदानी’ अथवा ‘देशभक्त’ है। ‘हुत’ का अर्थ आहुति दी हुई होता है। अर्थात जिसने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया हो।
४. ‘देशस्य स्वातन्त्र्यार्थम्‘ का प्रयोग
गलती: छात्र ‘देशस्य स्वातन्त्र्यार्थम्’ के प्रयोग को समझने में भ्रमित हो जाते हैं और विभक्ति बदल देते हैं।
सही तरीका: यहाँ ‘स्वातन्त्र्यार्थम्’ एक समस्त पद है, जिसका अर्थ ‘स्वतंत्रता के लिए’ है। इसलिए मूल वाक्य में प्रयुक्त रूप को ही लिखें। अनावश्यक रूप से विभक्ति परिवर्तन करने से व्याकरणिक अशुद्धि हो सकती है।
(नोट: “अर्थम् = हमेशा द्वितीया लगेगी” जैसा सामान्य नियम लिखना उचित नहीं है, क्योंकि यह सभी स्थितियों में लागू नहीं होता।)
५. ऐतिहासिक वर्ष और संस्कृत संख्या-पद
गलती: खुदीराम बोस के बलिदान वर्ष 1908 को संस्कृत संख्या-पदों से जोड़ने में छात्र कठिनाई अनुभव करते हैं।
सही तरीका: पाठ में प्रयुक्त संख्या-पदों को ध्यान से पढ़ें और उनका अभ्यास करें। परीक्षा में यदि 1908 अथवा उससे संबंधित संस्कृत संख्या-पद पूछा जाए, तो घबराएँ नहीं। संख्या-पदों का नियमित अभ्यास करने से ऐसे प्रश्न आसानी से हल किए जा सकते हैं।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Question and Answer):
१. खुदीरामबोसस्य जन्म कुत्र अभवत् ?
(खुदीराम बोस का जन्म कहाँ हुआ था?)
उत्तर: मिदनापुरनगरे
२. खुदीरामः कस्य आन्दोलने प्रविष्टः ?
(खुदीराम बोस किस आन्दोलन में शामिल हुए?)
उत्तर: बङ्गभङ्ग-आन्दोलने
३. कतिवर्षीयः खुदीरामः देशसेवायाम् प्रविष्टः ?
(कितने वर्ष की आयु में खुदीराम देश सेवा में शामिल हुए?)
उत्तर: पञ्चदशवर्षीयः
४. कस्य वीरस्य चरितं पठित्वा खुदीरामः उपानहौ न अधारयत् ?
(किस वीर का चरित्र पढ़कर खुदीराम ने जूते नहीं पहने?)
उत्तर: प्रतापस्य (महाराणा प्रतापस्य)
५. खुदीरामस्य गुरुः कः आसीत् ?
(खुदीराम के गुरु कौन थे?)
उत्तर: सत्येन्द्रनाथः
६. क्रूरः आङ्ग्लन्यायाधीशः कः आसीत् ?
(क्रूर अंग्रेज न्यायाधीश कौन था?)
उत्तर: किंग्सफोर्डः
७. किंग्सफोर्डं दण्डयितुं खुदीरामेण सह कः अगच्छत् ?
(किंग्सफोर्ड को दंडित करने के लिए खुदीराम के साथ कौन गया?)
उत्तर: प्रफुल्लः (प्रफुल्लचाकी)
८. प्रफुल्लचाकी केन आत्मानं हतवान् ?
(प्रफुल्ल चाकी ने किससे स्वयं के प्राण लिए/गोली मारी?)
उत्तर: गुलिकया (पिस्तौल की गोली से)
९. कारागारे खुदीरामः किम् जपन् आसीत् ?
(जेल में खुदीराम किसका जाप कर रहे थे?)
उत्तर: वन्देमातरम्
१०. तेजसः हेतुः किं न भवति ?
(तेज या प्रतिभा का कारण क्या नहीं होती?)
उत्तर: वयः (उम्र/आयु)
लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Question and Answer):
१. खुदीरामबोसस्य जन्म कदा कुत्र च अभवत् ?
(खुदीराम बोस का जन्म कब और कहाँ हुआ था?)
उत्तर: खुदीरामबोसस्य जन्म १८८९ तमे वर्षे बङ्गप्रान्तस्य मिदनापुरजनपदे अभवत्।
(खुदीराम बोस का जन्म 1889 ईस्वी में बंगाल प्रांत के मिदनापुर जिले में हुआ था।)
२. खुदीरामः उपानहौ किमर्थं न अधारयत् ?
(खुदीराम ने जूते किसलिए नहीं पहने?)
उत्तर: खुदीरामः महाराणाप्रतापस्य कष्टमयं राष्ट्रभक्तिपूर्णं च चरितं पठित्वा उपानहौ न अधारयत्।
(खुदीराम ने महाराणा प्रताप का कष्टमय और राष्ट्रभक्ति से भरा चरित्र पढ़कर जूते नहीं पहने।)
३. सत्येन्द्रनाथः खुदीरामाय किम् अयच्छत् ?
(सत्येन्द्रनाथ ने खुदीराम को क्या दिया?)
उत्तर: गुरुः सत्येन्द्रनाथः देशसेवायै प्रवृत्ताय खुदीरामाय गुप्तरूपेण भगवद्गीतां शस्त्रसञ्चालनशिक्षणं च अयच्छत्।
(गुरु सत्येन्द्रनाथ ने देश सेवा में लगे हुए खुदीराम को गुप्त रूप से भगवद्गीता और शस्त्र चलाने की शिक्षा दी।)
४. बङ्गभङ्ग-आन्दोलनस्य मुख्यं कारणं किम् आसीत् ?
(बंगाल विभाजन आन्दोलन का मुख्य कारण क्या था?)
उत्तर: बङ्गभङ्ग-आन्दोलनस्य मुख्यं कारणम् आङ्ग्लशासकैः कृतं बङ्गप्रान्तस्य विभाजनम् आसीत्।
(बंगाल विभाजन आन्दोलन का मुख्य कारण अंग्रेज शासकों द्वारा बंगाल प्रांत का विभाजन करना था।)
५. क्रूरः न्यायाधीशः किंग्सफोर्डः देशभक्तान् कथं दण्डयति स्म ?
(क्रूर न्यायाधीश किंग्सफोर्ड देशभक्तों को कैसे दंडित करता था?)
उत्तर: क्रूरः न्यायाधीशः किंग्सफोर्डः देशभक्तान् कारागारे प्रक्षिप्य कशाघातैः क्रूरतापूर्वकं दण्डयति स्म।
(क्रूर न्यायाधीश किंग्सफोर्ड देशभक्तों को जेल में डालकर कोड़ों की मार से क्रूरतापूर्वक दंडित करता था।)
६. किंग्सफोर्डं दण्डयितुं गुप्तसमित्या कौ नियुक्तौ ?
(किंग्सफोर्ड को दंडित करने के लिए गुप्त समिति द्वारा कौन नियुक्त किए गए?)
उत्तर: किंग्सफोर्डं दण्डयितुं गुप्तसमित्या खुदीरामबोसः प्रफुल्लचाकी च नियुक्तौ।
(किंग्सफोर्ड को दंडित करने के लिए गुप्त समिति द्वारा खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी नियुक्त किए गए।)
७. यानस्य उपरि प्रहारसमये का दुर्घटना अभवत् ?
(वाहन पर प्रहार करते समय क्या दुर्घटना हुई?)
उत्तर: यानस्य उपरि प्रहारसमये किंग्सफोर्डस्य स्थाने द्वे आङ्ग्लमहिला आहत्य मृते अभवताम्।
(वाहन पर प्रहार करते समय किंग्सफोर्ड के स्थान पर दो अंग्रेज महिलाएं चोटिल होकर मृत्यु को प्राप्त हुईं।)
८. प्रफुल्लचाकी आत्मबलिदानं कथं कृतवान् ?
(प्रफुल्ल चाकी ने आत्मबलिदान कैसे किया?)
उत्तर: प्रफुल्लचाकी आङ्ग्लेभ्यः बन्धनं भिया स्वकीयेन हस्तेन गुलिकया प्रहृत्य आत्मबलिदानं कृतवान्।
(प्रफुल्ल चाकी ने अंग्रेजों के बंधन (पकड़े जाने) के डर से अपने हाथ से गोली मारकर आत्मबलिदान किया।)
९. कारागारे फांसीसमये खुदीरामस्य व्यवहारः कीदृशः आसीत् ?
(जेल में फाँसी के समय खुदीराम का व्यवहार कैसा था?)
उत्तर: कारागारे फांसीसमये खुदीरामः हसन् ‘वन्दे मातरम्’ इति जपन् च पाशम् अचुम्बत्।
(जेल में फाँसी के समय खुदीराम हँसते हुए और ‘वन्दे मातरम्’ का जाप करते हुए फाँसी के फंदे को चूम गए।)
१०. ‘न खलु वयस्तेजसो हेतुः‘ इति पाठस्य मुख्यः सन्देशः कः अस्ति ?
(इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?)
उत्तर: अस्य पाठस्य मुख्यः सन्देशः अस्ति यत् देशसेवायै पराक्रमाय च आयुः कारणं न भवति, अपितु दृढसङ्कल्पः भवति।
(इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि देश सेवा और पराक्रम के लिए आयु कारण नहीं होती, बल्कि दृढ़ संकल्प होता है।)
FAQs (Frequently Asked Questions):
१. ‘न खलु वयस्तेजसो हेतुः‘ इति पाठस्य कः अर्थः अस्ति?
(पाठ के शीर्षक का क्या अर्थ है?)
उत्तर: अस्य अर्थः अस्ति यत् पराक्रमाय प्रतिभायै च आयुः (उम्र) कारणं न भवति।
(‘न खलु वयस्तेजसो हेतुः’ का अर्थ है कि वीरता, पराक्रम या प्रतिभा के लिए आयु (उम्र) मायने नहीं रखती।)
२. अयं पाठः कयोः वीरयोः जीवनस्य उपरि आधारितः अस्ति?
(यह पाठ किन दो वीरों के जीवन पर आधारित है?)
उत्तर: अयं पाठः अमरक्रान्तिवीरयोः खुदीरामबोस-प्रफुल्लचाकी महोदययोः जीवनस्य उपरि आधारितः अस्ति।
(यह पाठ अमर क्रांतिकारी खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी के जीवन और बलिदान पर आधारित है।)
३. खुदीराम बोसस्य बाल्यकालः कुत्र व्यतीतः अभवत्?
(खुदीराम बोस का बचपन कहाँ और किस राज्य में बीता?)
उत्तर: खुदीरामबोसस्य जन्म बाल्यकालः च बङ्गप्रान्तस्य (पश्चिमबंगालस्य) मिदनापुरजनपदे अभवत्।
(खुदीराम बोस का जन्म और बचपन बंगाल प्रांत (वर्तमान पश्चिम बंगाल) के मिदनापुर जिले में बीता था।)
४. खुदीरामः कतिवर्षीयः आसीत् यदा सः देशसेवायाम् प्रविष्टः?
(खुदीराम कितने वर्ष के थे जब वे देश सेवा में शामिल हुए?)
उत्तर: सः मात्र पञ्चदशवर्षीयः (15 वर्ष) आसीत् यदा देशसेवायाम् प्रविष्टः।
(वे मात्र 15 वर्ष की अल्पायु में ही अपनी कक्षा छोड़कर देश की स्वतंत्रता के आंदोलन में कूद पड़े थे।)
५. खुदीरामः उपानहौ न धारयितुं किं सङ्कल्पं कृतवान्?
(खुदीराम ने जूते न पहनने का कठिन संकल्प क्यों लिया था?)
उत्तर: महाराणाप्रतापस्य देशभक्तिपूर्णं कष्टमयं च जीवनं पठित्वा सः उपानहौ न अधारयत्।
(वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के संघर्ष और कठिन देशभक्ति से प्रेरित होकर उन्होंने जूते न पहनने की प्रतिज्ञा की थी।)
६. किंग्सफोर्डः कः आसीत्, तं दण्डयितुं किमर्थं आवश्यकम् आसीत्?
(किंग्सफोर्ड कौन था और उसे दंडित करना क्यों ज़रूरी था?)
उत्तर: किंग्सफोर्डः एकः क्रूरः आङ्ग्लन्यायाधीशः आसीत् यः भारतीयदेशभक्तान् कठोरं दण्डयति स्म।
(किंग्सफोर्ड एक अत्याचारी अंग्रेज जज था, जो वंदे मातरम् बोलने वाले भारतीय देशभक्तों को कोड़ों की मार जैसी क्रूर सजा देता था।)
७. किंग्सफोर्डस्य उपरि प्रहारस्य योजना का संस्था अकरोत्?
(किंग्सफोर्ड पर बम फेंकने की योजना किस गुप्त संगठन ने बनाई थी?)
उत्तर: एषा योजना क्रान्तिकारिणाम् एका गुप्तसमितिः अकरोत्।
(यह योजना स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों की एक गुप्त समिति द्वारा तैयार की गई थी।)
८. 1908 तमस्य वर्षस्य अप्रैल-मासे का दुर्घटना अभवत्?
(३० अप्रैल १९०८ को मुजफ्फरपुर में क्या दुर्घटना हुई थी?
उत्तर: प्रमादात् किंग्सफोर्डस्य स्थाने द्वे आङ्ग्लमहिला (कैनेडी महोदये) मृते अभवताम्।
(दुर्भाग्यवश बम किंग्सफोर्ड की गाड़ी पर न गिरकर दूसरी गाड़ी पर गिरा, जिससे दो निर्दोष अंग्रेज महिलाएँ मारी गईं।)
९. प्रफुल्लचाकी कथं आङ्ग्लहस्ते न बद्धः?
(प्रफुल्ल चाकी अंग्रेजों के हाथों पकड़े क्यों नहीं गए?)
उत्तर: सः आङ्ग्लेभ्यः बन्धनं भिया मोकामाघट्टरेलस्थानके स्वयमेव गुलिकया आत्मानं हतवान्।
(पकड़े जाने और अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार करने के बजाय उन्होंने मोकामा घाट रेलवे स्टेशन पर खुद को गोली मार ली।)
१०. खुदीरामबोसस्य फांसी कुत्र कदा च अभवत्?
(खुदीराम बोस को किस उम्र में और कहाँ फाँसी दी गई थी?)
उत्तर: खुदीरामबोसस्य फांसी ११ अगस्त १९०८ तमे वर्षे मुजफ्फरपुरकारागारे अभवत्, तदा सः अष्टादशवर्षीयः आसीत्।
(खुदीराम बोस को 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर जेल में फाँसी दी गई थी, तब उनकी आयु मात्र 18 वर्ष (अठारह वर्ष) थी।)
११. फांसीसमये खुदीरामस्य अन्तिमशब्दाः के आसन्?
(फाँसी के फंदे पर झूलते समय खुदीराम के अंतिम शब्द क्या थे?)
उत्तर: फाँसी के फंदे को चूमते हुए उनके मुख पर केवल ‘वन्दे मातरम्’ का महामंत्र था।
(कारागारे फांसीसमये खुदीरामः हसन् ‘वन्दे मातरम्’ इति जपन् प्राणान् अमुञ्चत्।)
१२. अस्य पाठस्य का शिक्षा अस्ति?
(इस पाठ से आज के विद्यार्थियों को क्या नैतिक शिक्षा मिलती है?)
उत्तर: अयं पाठः छात्रेषु राष्ट्रप्रेम, अदम्य साहस, दृढसङ्कल्पं च शिक्षयति।
(यह पाठ छात्रों को सिखाता है कि मातृभूमि की सेवा और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने के लिए आयु नहीं, बल्कि मन का अटूट संकल्प और साहस मायने रखता है।)
