एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 3 संवादहीन प्रश्न उत्तर

Class 9 Hindi Ganga (2026–27) Chapter 3 “संवादहीन” is written by Shekhar Joshi (शेखर जोशी). This story presents the loneliness and emotional struggles of an elderly couple living in a village. Through the emotional distance and limited interaction among family members, the writer presents how lack of understanding and communication can slowly weaken relationships. यह संवादहीन – अध्याय मानवीय भावनाओं, सामाजिक वास्तविकताओं और बदलते पारिवारिक मूल्यों को खूबसूरती से दर्शाता है। यह विद्यार्थियों को जीवन में प्रेम, देखभाल और सार्थक संवाद के महत्व को समझने के लिए प्रेरित करता है।

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

मेरे उत्तर मेरे तर्क – (पेज 52 के प्रश्न उत्तर)

1. कहानी में ताई और मिट्टू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?

(क) परोपकार और त्याग

(ख) ममता और स्नेह

(ग) करुणा और क्रोध

(घ) जिज्ञासा और सहायता

सही उत्तर: (ख) ममता और स्नेह।

उत्तर: ताई और मिट्टू का संबंध गहरा भावनात्मक है। ताई के लिए मिट्टू केवल एक तोता नहीं, बल्कि उनके अकेलेपन का साथी और ममता का केंद्र है, जिससे वे अपने मन की बातें साझा करती हैं।

विस्तृत व्याख्या: कहानी में ताई और मिट्टू का रिश्ता अटूट ममता और स्नेह पर आधारित है। अपने परिवार से दूर और अकेलेपन से जूझ रही ताई के लिए मिट्टू एक पुत्र के समान है। वे उससे बातें करती हैं, उसे डाँटती भी हैं और उसका ख्याल भी रखती हैं। मिट्टू भी उनकी आवाज़ और भावनाओं को समझता है। यह संबंध दर्शाता है कि स्नेह की भाषा मनुष्य और पक्षियों के बीच के फासले को मिटाकर उन्हें एक-दूसरे का सहारा बना देती है।

2. जगन मास्टर द्वारा मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?

(क) अनुशासन और परंपरा

(ख) उदासीनता और असावधानी

(ग) आत्मगौरव और विद्रोह

(घ) करुणा और नैतिकता

सही उत्तर: (घ) करुणा और नैतिकता।

उत्तर: जगन मास्टर का यह कार्य जीव मात्र के प्रति उनकी करुणा और दया को दर्शाता है। वे किसी भी जीव को परतंत्रता या पिंजरे के कष्ट में नहीं देख सकते, जो उनकी उच्च नैतिक सोच का प्रतीक है।

विस्तृत व्याख्या: जगन मास्टर द्वारा मिट्टू को पिंजरे से बाहर निकालना उनके भीतर छिपी करुणा और नैतिकता का परिचायक है। वे समझते हैं कि स्वतंत्रता हर जीव का जन्मसिद्ध अधिकार है और उसे कैद करना अनैतिक है। उनका यह कदम इस मूल्य को स्थापित करता है कि हमें मूक प्राणियों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। यह कार्य केवल एक पक्षी को मुक्त करना नहीं था, बल्कि समाज को दया और स्वतंत्रता के महत्व का संदेश देना भी था।

3. मिट्टू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?

(क) भोजन की खोज

(ख) प्रेम की आकांक्षा

(ग) स्वतंत्रता की चाह

(घ) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति

सही उत्तर: (ग) स्वतंत्रता की चाह।

उत्तर: मिट्टू का उड़ जाना यह सिद्ध करता है कि कोई भी जीव चाहे उसे कितना ही सुख क्यों न मिले, पिंजरे की सुख-सुविधाओं के बदले खुले आसमान की आज़ादी को ही सबसे ऊपर मानता और चुनता है।

विस्तृत व्याख्या: मिट्टू का उड़ जाना ‘स्वतंत्रता की चाह’ के शाश्वत विचार को प्रस्तुत करता है। यद्यपि ताई उसे प्रेम करती थीं और उसे समय पर भोजन मिलता था, फिर भी उसके लिए खुले आसमान की उड़ान का महत्व पिंजरे के सुनहरे बंधन से कहीं अधिक था। यह घटना दर्शाती है कि परतंत्रता में मिलने वाला सर्वोत्तम सुख भी स्वतंत्रता के अभाव में फीका है। आज़ादी की यह नैसर्गिक प्रवृत्ति केवल मनुष्यों में ही नहीं, बल्कि पक्षियों में भी उतनी ही प्रबल होती है।

4. ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?

(क) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना

(ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव

(ग) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता

(घ) मिट्टू के प्रति प्रेम और संवाद

सही उत्तर: (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव।

उत्तर: ताई के दुख का सबसे बड़ा कारण उनका अकेलापन था। अपने परिवार और प्रियजनों से दूर होने के कारण उनके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जिससे वे अपने मन की बातें साझा कर सकें।

विस्तृत व्याख्या: ताई के जीवन की व्यथा का मूल कारण परिवार से विछोह और उनके जीवन में व्याप्त गहरा संवादहीनता का भाव था। बुढ़ापे के इस पड़ाव पर जब व्यक्ति को अपनों के साथ और बातचीत की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, तब ताई बिल्कुल अकेली थीं। इसी संवाद के अभाव को भरने के लिए उन्होंने मिट्टू को अपना सहारा बनाया था। परिवार की अनुपस्थिति ने उनके जीवन में एक खालीपन भर दिया था, जिसे समाज की कोई भी अन्य वस्तु पूरी नहीं कर सकती थी।

5. कहानी में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?

(क) मजबूरी

(ख) कर्मपरायणता

(ग) अकेलापन

(घ) संवादधर्मिता

सही उत्तर: (ग) अकेलापन।

उत्तर: यह कहानी आधुनिक समाज में वृद्धों के अकेलेपन की विसंगति को उजागर करती है। जहाँ लोग भौतिकता की दौड़ में अपने घर के बड़ों और उनके साथ संवाद करना भूल जाते हैं, जिससे वे उपेक्षित महसूस करते हैं।

विस्तृत व्याख्या: ‘संवादहीन’ कहानी मानव-समाज में बढ़ते हुए ‘अकेलेपन’ की गंभीर विसंगति को सामने लाती है। विशेषकर नगरीय और ग्रामीण जीवन के बीच टूटते रिश्तों ने वृद्धों को एकाकी जीवन जीने पर मजबूर कर दिया है। आज के समाज में लोग एक-दूसरे के निकट तो हैं, लेकिन उनके बीच सार्थक संवाद की कमी है। ताई का पात्र इस सामाजिक त्रासदी का प्रतीक है, जहाँ इंसान अपनों के बीच रहकर भी उपेक्षित और संवाद के लिए तरसता हुआ जीवन बिताने को विवश है।

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए:

मेरी समझ मेरे विचार – (पेज 53 के प्रश्न उत्तर)

1. “भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?

उत्तर: ताई यहाँ अपने जीवन रूपी नैया की बात कर रही हैं। वे बुढ़ापे में अकेलेपन और परिवार के अभाव के कारण चिंतित हैं। उन्हें डर है कि इस एकाकी जीवन का अंत कैसे होगा और उनकी देखरेख कौन करेगा।

विस्तृत व्याख्या: इस वाक्य में ताई अपने शेष जीवन की कठिन यात्रा को ‘नैया’ कह रही हैं। पति की मृत्यु के बाद और बेटों के बाहर रहने के कारण वे बिल्कुल अकेली पड़ गई हैं। उनके पास मन की बात कहने के लिए कोई मनुष्य नहीं है। बुढ़ापे की बीमारियाँ और घर की जिम्मेदारियाँ उन्हें भारी लगती हैं। उन्हें भविष्य असुरक्षित नज़र आता है, इसलिए वे ईश्वर से गुहार लगाती हैं कि इस कष्टकारी और एकाकी जीवन का अंत कैसे होगा।

2. “धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर: यह वाक्य ताई की संपत्ति और घर के नियंत्रण के छिन जाने की ओर संकेत करता है। बेटों के शहर चले जाने और घर की बागडोर दूसरों या रिश्तेदारों के हाथों में चले जाने से ताई खुद को लाचार महसूस करती हैं।

विस्तृत व्याख्या: इस वाक्य के माध्यम से ताई के जीवन की उस त्रासदी को दर्शाया गया है जहाँ उनकी जमीन, जायदाद और घर का प्रबंध अब उनके नियंत्रण में नहीं रहा। उनके परिवार के लोग दूर हो गए और घर की व्यवस्था बाहरी लोगों या दूर के रिश्तेदारों के भरोसे चलने लगी। ताई, जो कभी उस घर की मालकिन थीं, अब केवल एक मूक दर्शक बनकर रह गईं। यह उनके अधिकार और प्रभाव के खत्म होने की पीड़ादायक घटना है।

3. “ताई की सारी ममता मिट्टू पर बरस पड़ी।” क्यों?

उत्तर: ताई का अपना परिवार उनसे दूर था, जिससे उनके भीतर का वात्सल्य अतृप्त था। मिट्टू तोता ही एकमात्र ऐसा जीव था जो उनके पास रहता था, इसलिए उन्होंने अपनी सारी ममता और स्नेह उस बेजुबान पक्षी पर केंद्रित कर दिया।

विस्तृत व्याख्या: मनुष्य का स्वभाव है कि उसे प्रेम करने के लिए किसी आधार की आवश्यकता होती है। ताई के बेटे और पोते-पोतियां उनके पास नहीं थे, जिससे उनकी ममता को कोई ठिकाना नहीं मिल रहा था। जब मिट्टू उनके जीवन में आया, तो वह उनके अकेलेपन का साथी बन गया। वे उसे खाना खिलातीं और उससे बातें करतीं। परिवार से मिले संवादहीनता के दुख को भुलाने के लिए उन्होंने मिट्टू को ही अपना बच्चा मान लिया और अपना सारा प्यार उस पर न्योछावर कर दिया।

4. “अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तर: यह वाक्य दर्शाता है कि ताई अब घर की बड़ी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूँढने लगी थीं। उनके जीवन का केंद्र अब केवल मिट्टू की पसंद और उसकी सुख-सुविधाएं बन गया था, जिससे वे अधिक संवेदनशील हो गई थीं।

विस्तृत व्याख्या: इस परिवर्तन से पता चलता है कि ताई का व्यक्तित्व अब बाहरी दुनिया से सिमटकर मिट्टू तक सीमित हो गया था। जो महिला कभी पूरे घर का प्रबंध देखती थी, वह अब तोते के लिए हरी मिर्च और अमरूद की खोज में जुटी रहती थी। यह उनके एकाकीपन की पराकाष्ठा थी जहाँ एक पक्षी की खुशी ही उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य बन गई थी। यह उनके स्वभाव में आए उस ठहराव और सूक्ष्म अवलोकन को भी दर्शाता है जो अक्सर अत्यधिक अकेलेपन में उपजता है।

5. “जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जगन मास्टर एक करुणामयी, नैतिक और स्वतंत्र विचारों वाले व्यक्ति थे। वे जीव-हिंसा और परतंत्रता के विरोधी थे। इसका उदाहरण तब मिलता है जब वे ताई के प्रिय मिट्टू को पिंजरे से आजाद कर देते हैं क्योंकि वे पक्षियों को कैद रखना पाप समझते थे।

विस्तृत व्याख्या: जगन मास्टर का व्यक्तित्व आधुनिक और संवेदनशील मूल्यों से निर्मित था। वे परंपराओं या किसी की भावनाओं के नाम पर जीव को कैद करने के पक्ष में नहीं थे। कहानी में जब वे देखते हैं कि मिट्टू पिंजरे में बंद है, तो उनकी अंतरात्मा उसे मुक्त करने को कहती है। उनका मानना था कि पक्षी खुले आसमान के लिए बने हैं। ताई के दुख को जानते हुए भी उन्होंने नैतिकता को ऊपर रखा और मिट्टू को उड़ा दिया, जो उनके दृढ़ और दयालु स्वभाव को प्रकट करता है।

6. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है – ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: यह शीर्षक ‘ताई’ के लिए सबसे अधिक सार्थक है। वे अपनों के बीच रहकर भी संवाद के लिए तरसती हैं। परिवार के साथ उनका रिश्ता पूरी तरह संवादहीन हो चुका है, जिससे वे एक तोते से बातें करने को मजबूर हैं।

विस्तृत व्याख्या: शीर्षक ‘संवादहीन’ मुख्य रूप से ‘ताई’ के जीवन की रिक्तता को परिभाषित करता है। उनके घर में भौतिक सुख तो हो सकते हैं, लेकिन भावनात्मक संवाद की कमी है। बेटों का पत्र न आना और पोतों से बात न होना उन्हें मौन की गहरी खाइयों में धकेल देता है। यहाँ तक कि नया तोता भी पुराने मिट्टू की तरह उनसे बात नहीं करता। यह शीर्षक उस सामाजिक विसंगति को उजागर करता है जहाँ मनुष्य भीड़ में होकर भी एक-दूसरे से संवाद करने में असमर्थ है।

7. “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?

उत्तर: घर केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि लोगों की चहल-पहल और संवाद से बनता है। ताई के घर में कोई सदस्य नहीं था और चारों तरफ केवल सन्नाटा पसरा था, इसलिए वह एक विशाल हवेली होने के बावजूद खंडहर जैसा निर्जीव और डरावना प्रतीत होता था।

विस्तृत व्याख्या: घर को खंडहर कहना ताई की मानसिक और सामाजिक स्थिति का प्रतीक है। जिस घर में कभी खुशियाँ और शोर-शराबा रहा होगा, अब वहां केवल धूल और खामोशी का राज है। परिवार के सदस्यों के अभाव में घर की आत्मा मर चुकी थी। खंडहर उस वस्तु को कहते हैं जो अपना महत्व और उपयोगिता खो चुकी हो। ताई का घर भी अपनी रौनक खो चुका था, जहाँ केवल स्मृतियाँ शेष थीं और कोई नया जीवन या संवाद पनपने की गुंजाइश नहीं थी।

नीचे कुछ उत्तर और उनके दो-दो प्रश्न दिए गए हैं। पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?

मेरे प्रश्न – (पेज 53 के प्रश्न उत्तर)

1. उत्तर : ताई के अकेलेपन को मिट्टू ने सहारा दिया।

प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?

प्रश्न ख : ताई को मिट्टू किसने भेंट में दिया था?

उपयुक्त प्रश्न: प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?

उत्तर: ताई के घर में कोई सदस्य नहीं था, इसलिए वे अत्यंत अकेली थीं। मिट्टू तोता ही उनका एकमात्र साथी था जो उनके सूनेपन में सहारा बना।

विस्तृत व्याख्या: परिवार के अभाव में ताई का जीवन पूरी तरह खामोश और सूना हो चुका था। ऐसे में मिट्टू तोता ही उनका वह एकमात्र मित्र था जिससे वे अपने मन की बातें साझा करती थीं। ताई की ममता और दिनचर्या मिट्टू के इर्द-गिर्द सिमट गई थी, जिसने उनके अकेलेपन को दूर किया।

2. उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्टू उड़ गया था।

प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्टू कहाँ चला गया था?

प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

उपयुक्त प्रश्न: प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?

उत्तर: जब ताई तीर्थ यात्रा के लिए प्रयागराज गई थीं, तब जगन मास्टर ने मिट्टू को आजाद कर दिया। ताई के वापस आने से पहले ही वह उड़ गया था।

विस्तृत व्याख्या: ताई के जीवन का सबसे बड़ा सहारा मिट्टू तोता था। उनके प्रयागराज जाने के बाद, जगन मास्टर ने दयावश मिट्टू को पिंजरे से मुक्त कर दिया। ताई की अनुपस्थिति में मिट्टू का उड़ जाना उनके लिए एक बड़ी अनहोनी थी, क्योंकि लौटने पर उन्हें वह प्यारा साथी फिर कभी नहीं मिला।

3. उत्तर : गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।

प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?

प्रश्न ख : गाँववाले मिट्टू के उड़ने से खुश क्यों थे?

उपयुक्त प्रश्न: प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?

उत्तर: गाँववाले ताई की वापसी से इसलिए डरे हुए थे क्योंकि उन्हें पता था कि मिट्टू उड़ चुका है। उन्हें लगा कि यह खबर ताई को गहरा मानसिक सदमा देगी।

विस्तृत व्याख्या: गाँव के लोग जानते थे कि ताई के जीवन में मिट्टू का स्थान किसी संतान से कम नहीं था। जब मिट्टू उड़ गया, तो सबको यह चिंता सताने लगी कि ताई इस सच्चाई को सहन नहीं कर पाएँगी। इसी भय और ताई के प्रति सहानुभूति के कारण वे उनकी वापसी से चिंतित थे।

4. उत्तर : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है।

प्रश्न क : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है?

प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?

उपयुक्त प्रश्न: प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?

उत्तर: ‘संवादहीन’ का अर्थ है जहाँ बातचीत का अभाव हो। यह शीर्षक ताई के जीवन में व्याप्त गहरे मौन, एकाकीपन और अपनों से टूटे रिश्तों के दर्द को दर्शाता है।

विस्तृत व्याख्या: इस शीर्षक का गहरा भावार्थ यह है कि आधुनिक समाज में भौतिक सुविधाएँ तो हैं, लेकिन दिलों के बीच संवाद खत्म हो गया है। ताई अपनों के बीच रहकर भी मानसिक रूप से संवादहीनता का शिकार हैं। यह शीर्षक उस खामोशी की ओर संकेत करता है जो अकेलेपन और उपेक्षा से पैदा होती है।

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने अनुभवों के आधार पर दीजिए:

मेरे अनुभव मेरे विचार – (पेज 54 के प्रश्न उत्तर)

1. “कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?

उत्तर: जब मैं अपने परिवार से दूर होता हूँ, तो मन में सुरक्षा को लेकर निरंतर बेचैनी बनी रहती है। अपनों की कुशलता और घर की छोटी-बड़ी चीज़ों की चिंता मुझे मानसिक रूप से अस्थिर कर देती है।

विस्तृत व्याख्या: ताई की तरह, परिवार या प्रियजनों से दूर होने पर मेरा मन आशंकाओं से भर जाता है। मुझे बार-बार यह चिंता सताती है कि पीछे सब ठीक होगा या नहीं। किसी प्रिय व्यक्ति की तबीयत या घर की सुरक्षा का विचार मुझे भीतर से परेशान करता है। यह चिंता दर्शाती है कि हमारा जुड़ाव वस्तुओं और व्यक्तियों से कितना गहरा है। दूरी बढ़ने पर अक्सर हमें उनकी अहमियत का अधिक एहसास होता है और मन वापस लौटने को व्याकुल रहता है।

2. “आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।

उत्तर: मैं पूरी तरह मानता हूँ कि पशु-पक्षियों में संवेदनाएँ होती हैं। वे हमारी भाषा नहीं समझते, लेकिन प्यार और तिरस्कार के स्पर्श को पहचानते हैं। मेरा पालतू कुत्ता मेरे दुखी होने पर चुपचाप पास आकर बैठ जाता है।

विस्तृत व्याख्या: पशु-पक्षी मूक जरूर होते हैं, परंतु उनकी भावनाएँ अत्यंत प्रबल होती हैं। वे प्रेम, भय और वियोग को गहराई से महसूस करते हैं। एक बार मेरे घर की खिड़की पर रहने वाली चिड़िया का बच्चा गिर गया था, तब उसकी माँ की व्याकुलता और चीखें देखकर स्पष्ट था कि उनमें भी ममता होती है। वे इंसानों की तरह रो नहीं सकते, लेकिन अपनी हरकतों से अपनी खुशी और पीड़ा को पूरी सजीवता के साथ व्यक्त करते हैं।

3. “गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्टू की ही सूरत-शकल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

उत्तर: मेरे विचार से ताई को भ्रम में रखना उचित नहीं था। झूठ चाहे कितना ही मीठा क्यों न हो, वह सत्य का स्थान नहीं ले सकता। सच जानने पर होने वाली पीड़ा बाद में और अधिक गहरी हो जाती है।

विस्तृत व्याख्या: गनपत का सुझाव सहानुभूति पर आधारित था, लेकिन नैतिक रूप से यह गलत था। ताई का मिट्टू के साथ एक आत्मिक संबंध था, जिसे किसी दूसरे तोते से नहीं बदला जा सकता था। भ्रम में रखने से उनका विश्वास टूट सकता था। सच को स्वीकार करना कठिन होता है, लेकिन वह इंसान को हकीकत से जोड़ता है। ताई को सच बताकर उन्हें भावनात्मक सहारा देना अधिक उचित होता, क्योंकि बनावटी रिश्ता कभी असली जुड़ाव की जगह नहीं ले सकता।

4. “ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्टू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।

उत्तर: एक बार मैंने सोचा था कि परीक्षा में असफल होने पर पिताजी मुझ पर बहुत क्रोध करेंगे। लेकिन इसके विपरीत, उन्होंने मुझे गले लगाया और दोबारा मेहनत करने के लिए प्रेरित किया, जो मेरे लिए बिल्कुल अप्रत्याशित था।

विस्तृत व्याख्या: अक्सर जीवन में हमारी कल्पना और वास्तविकता के बीच बड़ा अंतर होता है। मैंने अपनी पुरानी सहेली से बरसों बाद मिलने का सोचा और लगा कि वह पहले जैसी ही होगी। मैंने उत्साह में उसके लिए उपहार लिए, लेकिन जब मिले तो पाया कि वह पूरी तरह बदल चुकी थी। हमारा संवाद औपचारिक बनकर रह गया। मैंने सोचा था कि पुरानी यादें ताज़ा होंगी, पर समय ने हमारे बीच एक संवादहीनता की दीवार खड़ी कर दी थी। वह अनुभव काफी दुखद रहा।

5. “मिट्टू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।

उत्तर: हाँ, लंबे समय तक बंधन में रहने पर प्राणी अपनी स्वाभाविक उड़ान भूल जाते हैं और गुलामी को ही जीवन मान लेते हैं। इसे ‘सीखी हुई लाचारी’ कहते हैं, जहाँ जीव अपनी स्वतंत्रता का साहस खो देता है। सर्कस के प्राणी बिल्कुल इसी प्रकार के ही होते हैं।

विस्तृत व्याख्या: निरंतर कैद में रहने से प्राणियों की मानसिक स्थिति बदल जाती है। वे पिंजरे की सुरक्षा और मुफ्त भोजन के इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि बाहर की चुनौतियों से डरने लगते हैं। उदाहरण के तौर पर, सर्कस के हाथियों या पिंजरे के तोतों को यदि खुला छोड़ दिया जाए, तो वे अक्सर वापस अपने पिंजरे में ही लौट आते हैं। उन्हें लगता है कि बाहर की दुनिया उनके लिए असुरक्षित है। यह परतंत्रता की पराकाष्ठा है, जहाँ जीव अपनी आज़ादी की मूल प्रवृत्ति को ही भुला देता है।

कहानी का अंत – (पेज 55 के प्रश्न उत्तर)

1. आपके अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?

उत्तर: ‘संवादहीन’ कहानी का अंत मुक्त एवं यथार्थवादी है, क्योंकि यह रिश्तों में बढ़ती दूरी और जीवन की वास्तविकता को दर्शाता है। कहानी का अंत ऐसा हो जहाँ परिवार के सदस्य आपसी संवाद से अपने रिश्तों को फिर से मजबूत बना लें।

विस्तृत व्याख्या: ‘संवादहीन’ कहानी का अंत ‘मुक्त अंत’ की श्रेणी में आता है क्योंकि लेखक ने अंत को पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया है। पिता और पुत्र के बीच बातचीत बंद होने पर कहानी बिना किसी अंतिम फैसले के रुक जाती है, जो पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है। यह समाज की कड़वी सच्चाई दिखाने के कारण एक ‘यथार्थवादी अंत’ भी है।

कहानी का नया अंत: यदि मुझे इस कहानी का नया अंत करना हो, तो मैं इसे एक ‘सुखांत और प्रेरणात्मक अंत’ देना चाहूँगा। नया अंत इस प्रकार होगा कि पिता या पुत्र में से कोई एक अपनी हिचक और अहंकार को छोड़कर संवाद की शुरुआत करता है। दोनों बैठकर अपने दिल की पुरानी गलतफहमियों को दूर करते हैं और गले लगकर रो पड़ते हैं। इस तरह उनके बीच की ‘संवादहीनता’ हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है और घर में फिर से खुशियाँ लौट आती हैं।

विषयों से संवाद – (पेज 56 के प्रश्न उत्तर)

1. “अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।” कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं ‘मास्टराइन’, तो कहीं ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?

उत्तर: ग्रामीण परिवेश में महिलाओं को अक्सर उनके पति के नाम या व्यवसाय से पहचान दी जाती है। लेखक ने ‘मास्टराइन’ कहकर समाज की उस परंपरा को दर्शाया है जहाँ महिला का अपना नाम गौण हो जाता है।

विस्तृत व्याख्या: कहानी में जगन मास्टर की पत्नी को नाम न देकर उन्हें ‘मास्टराइन’ या ‘घरवाली’ कहना ग्रामीण भारतीय समाज की यथार्थवादी झलक पेश करता है। गाँवों में प्रायः महिलाओं की स्वतंत्र पहचान के स्थान पर उन्हें पारिवारिक रिश्तों या पति के पद से संबोधित किया जाता है। लेखक ने इस शैली का प्रयोग करके पात्र को अधिक स्वाभाविक और परिवेश के अनुकूल बनाया है। यह पितृसत्तात्मक समाज की उस विसंगति को भी उजागर करता है जहाँ व्यक्ति का अपना नाम महत्वपूर्ण नहीं रह जाता।

2. “गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे” (क) ‘कुंभ-स्नान’ एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए- इसका आयोजन क्यों किया जाता है? पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था? अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?

उत्तर: कुंभ का आयोजन अमृत प्राप्ति की पौराणिक कथा के कारण चार पवित्र नदियों के तट पर होता है। पिछला पूर्ण कुंभ 2013 में प्रयागराज में हुआ था और अगला महाकुंभ 2025 में प्रयागराज में ही होगा।

विस्तृत व्याख्या: हिंदू धर्म के अनुसार, समुद्र मंथन के समय अमृत की बूंदें प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में गिरी थीं, इसलिए इन स्थानों पर कुंभ लगता है। पिछली बार वर्ष 2021 में हरिद्वार में कुंभ का आयोजन हुआ था (कोरोना के कारण सीमित)। अगला मुख्य आयोजन ‘महाकुंभ’ के रूप में जनवरी 2025 में प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में संगम तट पर होगा। यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम है जहाँ करोड़ों श्रद्धालु मोक्ष की कामना से स्नान करते हैं।

(ख) मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए। (संकेत- कहाँ से कहाँ तक की यात्रा, टिकट, यात्रा के साधन,संगी-साथी,खान-पान,ठहरना आदि।)

उत्तर: ताई गाँव के साथियों के साथ रेलगाड़ी से प्रयागराज गई होंगी। उन्होंने पहले से टिकट बुक कराया होगा और साथ में रास्ते के लिए पूड़ियाँ और अचार बाँधा होगा। वे संगम किनारे पंडों के यहाँ ठहरी होंगी।

विस्तृत व्याख्या: ताई ने मोहल्ले की अन्य बुजुर्ग महिलाओं के साथ तीर्थ यात्रा की योजना बनाई होगी। वे बस या रेलगाड़ी द्वारा प्रयागराज पहुँची होंगी। यात्रा के दौरान उन्होंने अपने साथ घर का बना सूखा नाश्ता जैसे मठरी और गुड़ रखा होगा। प्रयागराज पहुँचकर वे संगम तट पर बने टेंटों या धर्मशालाओं में रुकी होंगी। सामूहिक भजनों और गंगा आरती के बीच उनकी यह यात्रा भक्ति और श्रद्धा से भरपूर रही होगी, जहाँ उन्होंने अपनों के लिए सुख-शांति की प्रार्थना की होगी।

(ग) आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाजें, रंग, गंध,खान-पान,दृश्य और भाव होंगे? (संकेत- उनका वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों – देखने, सुनने, सूँघने, छूने और स्वाद महसूस करने के आधार पर कीजिए।)

उत्तर: हमारे यहाँ का मेला रंगों और आवाज़ों का संगम है। कानों में ढोल की थाप, आँखों में झूलों की चमक, नाक में ताज़ा जलेबियों की खुशबू और हाथों में मिट्टी के खिलौनों का स्पर्श मन को श्रद्धा से भर देता है।

विस्तृत व्याख्या: मेले का वातावरण अत्यंत ऊर्जावान होता है। आँखों को सजे हुए पंडाल और चमकीली लाइटें दिखती हैं, तो कानों में ‘भोंपू’ की आवाज़ और धार्मिक जयकारे गूँजते हैं। नाक को ताजी तली हुई कचौरियों की सोंधी खुशबू अपनी ओर खींचती है। जीभ पर ठंडी मलाई-बर्फ और गर्म चाट का अनूठा स्वाद मिलता है। भीड़ में लोगों के कंधों का स्पर्श और ठंडी हवा का झोंका एक जीवंत अनुभव देता है, जो श्रद्धा और आनंद का अद्भुत मिश्रण होता है।

3. संवादहीन का सारांश लिखिए (गंगा अध्याय 3 पाठ्य पुस्तक 2026-27)

उत्तर: NCERT कक्षा 9 के लिए हिंदी गंगा (नया 2026-27) तीसरा अध्याय  शेखर जोशी द्वारा रचित कहानी ‘संवादहीन’ आधुनिक समाज में बुजुर्गों के अकेलेपन और मूक प्राणियों के साथ उनके भावनात्मक जुड़ाव की एक मर्मस्पर्शी रचना है। यह कहानी एक वृद्ध महिला ‘ताई’ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने विशाल घर में बिल्कुल अकेली रहती हैं। उनके परिवार के सदस्य शहरों में बस गए हैं, जिससे उनके जीवन में गहरा सन्नाटा छा गया है। इस अकेलेपन को भरने के लिए ताई ने ‘मिट्ठू’ नाम के एक तोते को अपना सहारा बनाया है। ताई मिट्ठू से बातें करती हैं, उसे डाँटती हैं और उसी में अपने पोते-पोतियों की छवि देखती हैं।

कहानी में मोड़ तब आता है जब ताई तीर्थ यात्रा पर जाती हैं और उनके पीछे जगन मास्टर, दया भाव से प्रेरित होकर, मिट्ठू को पिंजरे से आजाद कर देते हैं। ताई जब वापस लौटती हैं, तो अपने इकलौते साथी को न पाकर टूट जाती हैं। गाँव वाले उन्हें भ्रम में रखने के लिए वैसा ही दूसरा तोता लाकर पिंजरे में रख देते हैं, लेकिन वह नया तोता मिट्ठू की तरह ताई से संवाद नहीं करता। अंततः, ताई उस नए तोते की खामोशी में खुद को और अधिक अकेला महसूस करती हैं। यह कहानी दर्शाती है कि रिश्तों में संवाद का होना कितना अनिवार्य है।

शेखर जोशी द्वारा रचित कहानी ‘संवादहीन’ के मुख्य बिंदु:

• वृद्ध जीवन की त्रासदी: कहानी आधुनिक समय में बुजुर्गों द्वारा झेले जा रहे एकाकीपन और उपेक्षा को संवेदनशीलता से उजागर करती है।

• मानव और पशु का संबंध: ताई और मिट्ठू का रिश्ता यह सिद्ध करता है कि प्रेम और ममता की कोई भाषा नहीं होती; पशु भी मनुष्य के दुखों के साथी बन सकते हैं।

• स्वतंत्रता बनाम बंधन: जगन मास्टर का तोते को आजाद करना यह विचार प्रस्तुत करता है कि हर जीव को स्वतंत्र रहने का अधिकार है, चाहे वह कितना ही प्रिय क्यों न हो।

• संवादहीनता का दर्द: कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ ताई के उस जीवन को दर्शाता है जहाँ बोलने के लिए शब्द तो हैं, लेकिन सुनने वाला कोई अपना नहीं है।

• बनावटी रिश्तों की विफलता: अंत में नया तोता ताई को वह सुख नहीं दे पाता जो मिट्ठू देता था, जो यह बताता है कि भावनाओं का स्थान कोई वस्तु या भ्रम नहीं ले सकता।

चर्चा आधारित प्रश्न (Discussion Based Questions)  और कल्पना आधारित प्रश्न (Imagination-Based Questions)

(पेज 56 और 57 के प्रश्न उत्तर)

प्रश्न 1: “बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।” ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?

उत्तर: ताई के बहू-बेटों ने उच्च शिक्षा, बेहतर रोजगार और आधुनिक सुविधाओं की तलाश में गाँव छोड़ा होगा। गाँव छोड़ते समय उन्होंने अपने सुनहरे भविष्य के सपने देखने के साथ-साथ पीछे छूट रहे माता-पिता और खेती-बाड़ी की सुरक्षा के बारे में भी सोचा होगा। अपना घर छोड़ने के लिए उन्होंने खुद को यह समझाकर तैयार किया होगा कि बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक उन्नति के लिए यह कदम आवश्यक है।

प्रश्न 2: “वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की।” कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। मिट्ठू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए। (संकेत— प्रारंभ कीजिए— “एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके…”)

उत्तर: एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके और असली मिट्ठू ताई के आँगन में आ बैठा। पिंजरे में उदास बैठे नए तोते को देखकर उसने पूछा, “तुम कौन हो?” नया तोता बोला, “मैं ताई का अकेलापन दूर करने आया हूँ, पर मुझे बोलना नहीं आता।” यह सुनकर मिट्ठू का दिल पिघल गया। उसने खिड़की पर जाकर आवाज लगाई— “ताई, राम-राम सीताराम!” ताई ने खुशी के आँसू बहाते हुए उसका स्वागत किया। मिट्ठू ने नए तोते को आज़ाद कराया और अब दोनों रोज आँगन में चहकने लगे। ताई का अकेलापन मिट गया।

प्रश्न 3: “अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” आज घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए— “आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि।” उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर: मैंने घर जाकर अपनी दादी जी से बात की। उन्होंने बताया कि उनके बचपन में मोबाइल या इंटरनेट नहीं था। वे अपना अधिकांश समय प्रकृति के बीच सहेलियों संग लुका-छिपी, रस्सी कूदना और गुड़िया के खेल खेलने में बिताती थीं। दोपहर में वे अपनी माँ के साथ घर के कामों में हाथ बंटाती थीं और रात को दादा-दादी से परियों की कहानियाँ सुनती थीं। उनका जीवन सादगी, आपसी प्रेम और संयुक्त परिवार के सुखद पलों से भरा हुआ था।

प्रश्न 4: “मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!” मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्ठू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।

उत्तर: जगन मास्टर द्वारा समाचार पत्र के लिए तैयार किया गया विज्ञापन:

लापता तोते की खोज संबंधी विज्ञापन

नाम: मिट्ठू (पालतू तोता)

रंग: चटकीला हरा, गले में गहरी लाल कंठी (माला)

विशेष पहचान: तिरछी आँखों से देखना, ‘राम-राम सीताराम’ बोलना और इंसानों की आवाज की नकल करना।

विवरण: यह तोता ताई के घर के रोशनदान से उड़ गया है। ताई इसके बिना बहुत उदास और संवादहीन हो गई हैं।

यदि यह तोता किसी को भी दिखाई दे या मिले, तो कृपया नीचे दिए गए पते पर तुरंत सूचित करें। जानकारी देने वाले को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।

सम्पर्क सूत्र: जगन मास्टर, पुराना बाज़ार, गाँव-रामपुर।

मोबाईल: 9876543210