NCERT कक्षा 9 हिंदी की नई पाठ्यपुस्तक ‘गंगा’ (Ganga) के अध्याय 1 ‘दो बैलों की कथा’ (Do Bailon Ki Katha) के संपूर्ण प्रश्न-उत्तर यहाँ आसान और सटीक भाषा में उपलब्ध हैं। महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित यह प्रसिद्ध कहानी हीरा और मोती नाम के दो बैलों की अटूट मित्रता, वीरता और स्वतंत्रता के संघर्ष को दर्शाती है। यदि आप Class 9 Hindi Chapter 1 Question Answer की तलाश में हैं, तो यहाँ पाठ्यपुस्तक के अभ्यास, व्याकरण (मुहावरे), गतिविधियों और पहेलियों के सबसे सरल उत्तर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
Table of Contents (Quick Links)
1. विधा से संवाद – (पेज 18 के प्रश्न उत्तर)
2. कहानी की रचना – (पेज 20 के प्रश्न उत्तर)
3. विषयों से संवाद – (पेज 20 के प्रश्न उत्तर)
4. पशुओं के लिए कानून – (पेज 21 के प्रश्न उत्तर)
5. हमारी धरोहर और संस्कृति – (पेज 22 के प्रश्न उत्तर)
6. अलग अलग और साथ साथ – (पेज 22 के प्रश्न उत्तर)
7. मार्ग खोजेंगे कैसे? – (पेज 23 के प्रश्न उत्तर)
8. व्याकरण की बात – (पेज 25 के प्रश्न उत्तर)
9. गतिविधियाँ – (पेज 26 के प्रश्न उत्तर)
NCERT Class 9 Do Bailon Ki Katha Part-1 (मुख्य प्रश्न-उत्तर पढ़े) ➔
विधा से संवाद – (पेज 18 के प्रश्न उत्तर)
1. आप कहानी लेखन की इस प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक कहानी का शीर्षक चुनिए और दिए गए मुख्य बिंदुओं को पूरा कीजिए-
| शीर्षक और लेखक | |
| विषय | |
| क्रिया/कार्य | |
| परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार | |
| चरित्र/पात्र | |
| परिणाम |
उत्तर:
| बिंदु | उत्तर |
| शीर्षक और लेखक | शीर्षक: ईदगाह लेखकः मुंशी प्रेमचंद |
| विषय | बाल मनोविज्ञान, त्याग, प्रेम और एक गरीब बच्चे की अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी व संवेदनशीलता। |
| क्रिया/कार्य | हामिद का मेले में जाना, खिलौने और मिठाइयों के लालच को छोड़कर अपनी दादी के लिए चिमटा खरीदना। |
| परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार | परिवेश/देश-कालः भारतीय ग्रामीण परिवेश और ईद के त्योहार का अवसर। मुख्य विचारः सच्चा प्रेम और आत्मीयता व्यक्ति को उम्र से पहले समझदार और त्यागी बना देती है। |
| चरित्र/पात्र | मुख्य पात्रः हामिद (छोटा अनाथ बालक) और अमीना (उसकी दादी)। अन्य पात्रः महमूद, मोहसिन, नूरे और समी (हामिद के दोस्त)। |
| परिणाम | चिमटा देखकर दादी पहले गुस्सा होती हैं, लेकिन हामिद के त्याग और वजह को जानकर उनका हृदय गद्गद हो जाता है और वे उसे गले लगाकर आशीर्वाद देती हैं। |
2. नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए-
| विशेषता | उदाहरण 2 |
| चित्रात्मक भाषा | सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली। |
| संवादात्मकता | |
| विरोधाभास | |
| व्यंग्य | |
| संघर्ष | |
| अतिशयोक्ति | |
| संदेह/उलझन |
उत्तर:
| विशेषता | उदाहरण 2 |
| चित्रात्मक भाषा | सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली। |
| संवादात्मकता | “भागना व्यर्थ है।” “तुम्हारी तो उसने जान ही ले ली थी।” |
| विरोधाभास | लेकिन जब नाँद में लगाए गए, तो एक ने भी उसमें मुँह न डाला। |
| व्यंग्य | जापान की मिसाल सामने है। एक ही विजय ने उसे संसार की सभ्य जातियों में गण्य बना दिया। |
| संघर्ष | गया दो आदमियों के साथ दौड़ा आ रहा है। दोनों के हाथों में लाठियाँ हैं। |
| अतिशयोक्ति | इन दोनों में इस समय दूनी शक्ति आ गई थी। एक-एक झटके में रस्सियाँ टूट गईं। |
| संदेह/उलझन | बैलों को क्या मालूम, वे क्यों भेजे जा रहे हैं। समझे, मालिक ने हमें बेच दिया। |
कहानी की रचना – (पेज 20 के प्रश्न उत्तर)
1. प्राय: कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत/बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:
1. मुख्य चरित्रों का संकेत
संकेत: कहानी की शुरुआत में ही लेखक गधे और बैल के स्वभाव की तुलना करते हैं और जल्द ही मुख्य पात्रों—हीरा और मोती का परिचय देते हैं।
2. समय और परिवेश (देश-काल) का संकेत
संकेत: शुरुआत में भारतवासियों की विदेश (अफ्रीका और अमेरिका) में दुर्दशा और जापान की विजय का उदाहरण दिया गया है।
3. भाषा और शैली का संकेत
संकेत: प्रारंभ से ही मुंशी प्रेमचंद जी की सहज, व्यावहारिक, मुहावरेदार और व्यंग्यात्मक भाषा का परिचय मिलता है।
4. भावी घटनाओं और संघर्ष का संकेत
संकेत: लेखक ने प्रारंभ में ही यह स्पष्ट कर दिया है कि अत्यधिक सीधापन और अत्याचार सहना संसार में बेवकूफी समझा जाता है।
विषयों से संवाद – (पेज 20 के प्रश्न उत्तर)
कहानी का समय और समाज
1. ‘दो बैलों की कथा’ कहानी जिस समय लिखी गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेजों का दमनकारी शासन चल रहा था। उस समय भारतवासी भी अपने-अपने ढंग से इस अंग्रेजी शासन का विरोध कर रहे थे। इस कार्य में लेखक भी किसी से पीछे नहीं थे। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने हेतु प्रेरित कर रहे थे।
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
| 1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ। | 1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी। |
| 2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। | 2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया। |
| 3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता। | 3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया। |
| 4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था। | 4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी। |
| 5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे। | 5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य। |
| 6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके। | 6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए। |
उत्तर:
| कहानी में से वाक्य | स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव |
| 1. | 6. |
| 2. | 5. |
| 3. | 4. |
| 4. | 2. |
| 5. | 1. |
| 6. | 3. |
पशुओं के लिए कानून – (पेज 21 के प्रश्न उत्तर)
1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
उत्तर: बैलों का काँजीहाउस में बंद होना सामाजिक व्यवस्था के दो चेहरों को दिखाता है। कानूनी रूप से यह न्याय था क्योंकि उन्होंने दूसरे किसान के मटर के खेत को चरकर नुकसान पहुँचाया था, जिसके हर्जाने के तौर पर उन्हें कैद किया गया।
परंतु, मानवीय और नैतिक दृष्टिकोण से यह घोर अन्याय था। काँजीहाउस में पशुओं को भूखा-प्यासा रखना, उन पर लाठियाँ बरसाना और अंत में कसाई को बेच देना कानून के नाम पर बेजुबान जीवों के साथ क्रूरता और घोर शोषण को दर्शाता है।
2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
उत्तर: यदि मुझे अवसर मिले, तो मैं बैलों और सभी मूक पशुओं के लिए निम्नलिखित कानूनी अधिकारों की माँग करूँगा। सबसे पहले, उनके साथ होने वाली किसी भी शारीरिक क्रूरता और अत्यधिक काम के बोझ के खिलाफ कड़ा कानून होना चाहिए।
दूसरा, काँजीहाउस जैसी जगहों पर उनके लिए पर्याप्त भोजन, साफ पानी और चिकित्सीय देखभाल को अनिवार्य संवैधानिक अधिकार बनाया जाए।
तीसरा, काम करने वाले पशुओं के लिए भी विश्राम का समय तय हो और बूढ़े या बीमार होने पर उन्हें कसाई को बेचना पूरी तरह गैरकानूनी घोषित हो।
3. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए। (संकेत – “थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम… है। हमारे साथ अन्याय हुआ है…।”)
उत्तर: सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
थाना – झूरी का काँठा
दिनांक: 27 मई 2026
विषय: गया द्वारा किए गए अत्याचार और काँजीहौस में बंद किए जाने की शिकायत।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हम झूरी काछी के पालतू बैल हीरा और मोती हैं। हमारे मालिक हमसे बहुत प्रेम करते हैं, परंतु कुछ दिन पहले उनके साले गया हमें अपने घर ले गए। वहाँ हमसे दिन-रात कठोर काम कराया गया तथा विरोध करने पर डंडों से मारा गया। हमें खाने के लिए केवल सूखा भूसा दिया जाता था।
बाद में मटर के खेत में पकड़कर हमें काँजीहौस में बंद कर दिया गया, जहाँ कई दिनों से हमें पर्याप्त चारा-पानी भी नहीं मिल रहा है। हमें भय है कि हमें कसाई को बेच दिया जाएगा।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि हमें इस कष्ट से मुक्त कराकर हमारे वास्तविक मालिक झूरी के पास पहुँचाने की कृपा करें।
भवदीय,
हीरा और मोती
(झूरी काछी के बैल)
हमारी धरोहर और संस्कृति – (पेज 22 के प्रश्न उत्तर)
1. “वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!”
कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?
उत्तर: कहानी के अनुसार हीरा और मोती निम्नलिखित कार्य कभी नहीं करते थे:
1. वे किसी असहाय, पराजित या गिरे हुए शत्रु पर हमला नहीं करते थे।
2. वे स्त्रियों पर सींग नहीं चलाते थे और उनका आदर करते थे।
3. वे किसी मासूम या अनाथ (जैसे भैरव की बेटी) को नुकसान नहीं पहुँचाते थे।
4. वे संकट के समय अपने मित्र को अकेला छोड़कर कभी नहीं भागते थे।
2. “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।”
“लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।”
हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
उत्तर:
1. हीरा के ये कथन निम्नलिखित उच्च भारतीय मूल्यों और नैतिक आदशों की ओर संकेत करते हैं:
2. दया और क्षमाशीलता: पराजित या असहाय शत्रु पर वार न करना और उसे प्राणदान देना।
3. स्त्री-सम्मान (नारी का आदर): समाज में स्त्रियों को पूजनीय मानना और उन पर हिंसा न करना।
4. धर्म और मर्यादा का पालन: परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, अपने नैतिक सिद्धांतों और मर्यादाओं का त्याग न करना।
3. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता”
(क) खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
उत्तर:
पारंपरिक उपकरण:
हँसिया (Sickle): पकी हुई फसलों की कटाई करने के लिए।
खुरपी (Trowel): खेतों से खरपतवार निकालने (निड़ाई) और छोटी खुदाई के लिए।
पाटा (Plank): जुताई के बाद खेत की मिट्टी को समतल करने के लिए।
आधुनिक उपकरण:
ट्रैक्टर (Tractor): खेत की तेज़ी से जुताई करने और सामान ढोने के लिए।
कंबाइन हार्वेस्टर (Combine Harvester): फसल की कटाई, थ्रेशिंग और सफाई एक साथ करने के लिए।
सीड ड्रिल (Seed Drill): बीज को खेत में सही दूरी और गहराई पर बोने के लिए।
(ख) भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?
उत्तर:
भारतीय संस्कृति में बैल कृषि और दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। वे निम्नलिखित कार्यों में सहायक होते हैं:
जैसे गाँव में:
1. खेतों की जुताई करने में।
2. कोल्हू चलाकर तेल या गुड़ निकालने में।
3. कुएँ से पानी (रहट/पुर) खींचकर सिंचाई करने में।
4. बैलगाड़ी के माध्यम से अनाज और चारा ढोने में।
और फिर शहरों में:
1. माल ढोने वाली गाड़ियों (बैलगाड़ी) को खींचने में।
2. जैविक खाद (गोबर खाद) उपलब्ध कराने में।
3. धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सवों (जैसे पोला, पोंगल, गोवर्धन पूजा) में आस्था और समृद्धि के प्रतीक के रूप में।
अलग अलग और साथ साथ – (पेज 22 के प्रश्न उत्तर)
“दो-चार बार मोती ने गाड़ी को सड़क की खाई में गिराना चाहा; पर हीरा ने संभाल लिया। वह ज्यादा सहनशील था।”
1. कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए। (संकेत – धैर्यवान, गुस्सैल, मेहनती, शांत, सहनशील आदि)
उत्तर:
कहानी के आधार पर हीरा और मोती दोनों ही स्वाभिमानी, वफादार और मेहनती बैल हैं, फिर भी स्वभाव में कुछ भिन्नताएँ हैं:
हीरा की विशेषताएँ:
1. सहनशील और शांत: हीरा अत्यधिक सहनशील और गंभीर स्वभाव का है।
2. धैर्यवान: संकट के समय वह आपा नहीं खोता और धैर्य से निर्णय लेता है।
3. अहिंसक तथा मर्यादित: वह गिरे हुए शत्रु और स्त्रियों पर वार न करने के नैतिक नियमों का दृढ़ता से पालन करता है।
मोती की विशेषताएँ:
1. उग्र और गुस्सैल: मोती का स्वभाव थोड़ा आक्रामक और निडर है।
2. साहसी और विद्रोही: वह अत्याचार के खिलाफ तुरंत विद्रोह करने और ईंट का जवाब पत्थर से देने में विश्वास रखता है।
3. मित्र के लिए समर्पित: अपने मित्र हीरा के लिए वह अपनी जान भी दांव पर लगाने को तैयार रहता है।
2. हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?
उत्तर:
हीरा और मोती की अलग-अलग विशेषताएँ एक-दूसरे के पूरक (Complementary) के रूप में काम करती हैं:
1. संतुलन बनाए रखना: मोती जब अत्यधिक गुस्से में आकर हिंसा या भागने का उतावलापन दिखाता है, तब हीरा अपनी सहनशीलता और शांत दिमाग से उसे रोककर बड़े खतरे से बचाता है।
2. संकट से निकालना: हीरा जब अत्यधिक सीधेपन या विपत्ति के कारण फँस जाता है, तब मोती का साहस और उग्रता उन्हें संकट से बाहर निकालने का रास्ता बनाती है (जैसे काँजीहाउस की दीवार तोड़ना)।
इस प्रकार, जहाँ हीरा का धैर्य मोती के आक्रोश को नियंत्रित करता है, वहीं मोती की निडरता हीरा के शांत स्वभाव को संबल देती है। दोनों मिलकर ही हर चुनौती को पार कर पाते हैं।
3. आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?
(संकेत– क्या-क्या करें और क्या-क्या न करें, कैसे पढ़ाई खेल आदि में एक-दूसरे की सहायता करें और साथ दें)
उत्तर:
भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से मैं अपने लिए ऐसा व्यवहार चाहता:
1. वे मेरी योग्यताओं और कमजोरियों दोनों का आदर करें।
2. यदि किसी विषय या खेल में मुझे कठिनाई हो, तो वे चिढ़ाने के बजाय मेरी सहायता करें।
3. मेरे विचारों या स्वभाव में भिन्नता होने पर भी मुझे अपनी बात कहने का पूरा अवसर दें।
वे (सहपाठी) मुझसे अपने लिए ऐसा व्यवहार चाहते हैं:
1. मैं उनके स्वभाव (जैसे शांत या चंचल) को स्वीकार करूँ और उनके साथ भेदभाव न करूँ।
2. पढ़ाई, खेल या परियोजना कार्य (Project work) में मिलकर उनका सहयोग करूँ।
3. जब भी उन्हें किसी बात में उलझन या समस्या हो, मैं धैर्य से उनकी बात सुनूँ और उनका साथ दूँ।
4. “दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।”
कहानी में अनेक स्थानों पर ‘मूक-भाषा’ का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।
उत्तर:
हमारे अनुमान और कल्पना के अनुसार हीरा और मोती निम्नलिखित तरीकों से आपस में मूक-भाषा (बिना बोले) में विचार-विनिमय करते होंगे:
1. शारीरिक संकेतों द्वारा: एक-दूसरे को चाटकर प्रेम प्रकट करना, सूँघकर हाल-चाल जानना या विनोद (मनोरंजन) के भाव से सींग मिलाना।
2. आँखों और चेहरे के भावों से: कनखियों (तिरछी नज़रों) से एक-दूसरे को देखकर अपनी सहमति, असहमति, विद्रोह या भय का संकेत देना।
3. साँसों और हुंकार से: एक विशेष प्रकार की साँस (फुंकार) छोड़कर या हल्की हुँकार भरकर खतरे से आगाह करना या निर्णय लेना।
4. आत्मिक/भावनात्मक जुड़ाव से: वर्षों साथ रहने के कारण वे एक-दूसरे की मनःस्थिति, दुख और खुशी को बिना कुछ कहे ही स्वाभाविक रूप से समझ जाते थे।
5. आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर:
हम दैनिक जीवन में कई अवसरों और स्थानों पर बिना बोले (सांकेतिक भाषा/अशाब्दिक संचार) संवाद करते हैं:
कब-कब और कहाँ-कहाँ (स्थान व अवसर):
1. कक्षा में पढ़ाई के दौरान: जब शिक्षक पढ़ा रहे हों और हमें मित्र से पेन माँगना हो या कुछ पूछना हो।
2. परीक्षा भवन में: शांत माहौल में केवल इशारों से एक-दूसरे का ध्यान खींचने के लिए।
3. अत्यधिक शोर वाले स्थानों पर: जैसे शादी-समारोह, बस-स्टॉप या मेले में जहाँ आवाज़ साफ़ न सुनाई दे।
4. जब कोई बीमार हो या सो रहा हो: घर या अस्पताल में किसी की नींद या आराम में बाधा न पहुँचाने के लिए।
उदाहरण:
1. हाथ के इशारे से: ‘हाँ’ या ‘ना’ में सिर हिलाना, अंगूठा दिखाकर (Thumbs up) शुभकामना देना, या हाथ हिलाकर ‘नमस्ते/बाय’ कहना
2. आँखों और चेहरे के भाव से: आँखों से चुप रहने का इशारा करना, मुस्कुराकर स्वागत करना या भौंहें चढ़ाकर असहमति जताना।
मार्ग खोजेंगे कैसे? – (पेज 23 के प्रश्न उत्तर)
“सीधे दौडते चले गए। यहाँ तक कि मार्ग का ज्ञान न रहा। जिस परिचित मार्ग से आये थे उसका यहाँ पता न था। नए-नए गाँव मिलने लगे।”
1. हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?
उत्तर:
हाँ, एक बार जब मैं अपने परिवार के साथ एक नए शहर में गया था, तो बाज़ार में भीड़ के कारण मुख्य रास्ते से थोड़ा भटक गया था। उस समय घबराने के बजाय मैंने निम्नलिखित तरीकों से अपने मार्ग का पता लगाया:
1. स्थानीय दुकानों के पते देखकर: आसपास की दुकानों और साइनबोर्ड्स (सूचना-पट) पर लिखे क्षेत्र का नाम पढ़ा।
2. स्थानीय लोगों की मदद से: पास के एक दुकानदार और पुलिसकर्मी से अपने गंतव्य का सही रास्ता पूछा।
3. फ़ोन और मानचित्र से: अपने अभिभावक को फ़ोन करके अपनी लोकेशन बताई और मोबाइल में गूगल मैप्स (ऑनलाइन मानचित्र) का सहारा लेकर सुरक्षित रास्ते पर पहुँच गया।
2. यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
(संकेत – ऑनलाइन मानचित्र, पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन, विद्यार्थी, सड़क पर लगे सूचना-पट, दुकानों के बोर्डों पर लिखे पते, डाकघर आदि।)
उत्तर:
यदि कोई व्यक्ति रास्ता भटक जाए, तो उसे घबराने के बजाय धैर्य रखते हुए निम्नलिखित सुरक्षात्मक कदम उठाने चाहिए:
1. धैर्य रखें और रुकें: तुरंत बिना सोचे-समझे आगे भागने के बजाय किसी सुरक्षित स्थान पर खड़े होकर स्थिति को समझें।
2. ऑनलाइन मानचित्र (GPS) का उपयोग: स्मार्टफोन में ऑनलाइन गूगल मैप्स की सहायता से अपनी वर्तमान लोकेशन और गंतव्य का मार्ग खोजें।
3. सूचना-पटों और बोर्डों की सहायता: सड़क किनारे लगे साइनबोर्ड्स, मील के पत्थरों, सरकारी भवनों, डाकघर या दुकानों के बोर्ड पर लिखे पते पढ़कर क्षेत्र की पहचान करें।
4. विश्वसनीय व्यक्तियों से सहायता: पास मौजूद पुलिस अधिकारी, होमगार्ड, स्कूल के विद्यार्थियों या डाकघर के कर्मचारियों से रास्ता पूछें।
5. सुरक्षित स्थान पर आश्रय: यदि रात का समय हो या रास्ता बिल्कुल न मिल रहा हो, तो पास के पुलिस स्टेशन, बैंक, या सरकारी भवन में जाकर मदद लें।
3. आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।
उत्तर:
विद्यालय के ‘आपातकालीन निकासी मानचित्र’ (Emergency Evacuation Map) के अनुसार:
1. निकासी का मार्ग: हमारी कक्षा के ठीक बाहर बाईं/दाहिनी ओर स्थित सीढ़ियाँ/गलियारा सीधा मुख्य मैदान (Assembly Ground) की तरफ जाता है।
2. निकटतम आपातकालीन द्वार: हमारी कक्षा से मुख्य सीढ़ियों की दूरी मात्र 10 मीटर है, जो आपातकालीन स्थिति (जैसे भूकंप या आग) में बिना किसी लिफ्ट के उपयोग के सीधे खुले क्षेत्र (Ground) में ले जाती है।
3. सुरक्षित स्थान: आपदा के समय किसी भी सुरक्षित निकास मार्ग से निकलकर विद्यालय का खुला खेल मैदान सबसे सुरक्षित स्थान निर्धारित किया गया है।
सृजन – (पेज 23 के प्रश्न उत्तर)
1. हीरा और मोती की दैनंदिनी
कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
कैसे लिखें-
| “आज का दिन…” से आरंभ करें। भावनाएँ लिखें (भूख, गुस्सा, दर्द)। अंत में आशा या संकल्प लिखें। |
(संकेत– “आज हमें काँजीहाउस में बंद किया गया। भूख से पेट जल रहा है। पर विश्वास है कि झूरी हमें वापस ले जाएगा।”)
उत्तर:
आज का दिन हमारे जीवन का सबसे बुरा और कष्टदायक दिन साबित हुआ। खेत के रखवालों ने हमें चारों तरफ़ से घेरकर पकड़ लिया और घसीटते हुए इस बदबूदार काँजीहाउस में बंद कर दिया।
यहाँ दिन-भर बीत जाने पर भी हमें चारे का एक तिनका तक नसीब नहीं हुआ, जिससे भूख के मारे पेट जल रहा है और पूरे शरीर में असहनीय दर्द हो रहा है। इस बेदर्दी और अमानवीय व्यवहार को देखकर हमारे मन में बहुत गुस्सा और आक्रोश भरा है।
पर हमें पूरा विश्वास है कि हमारा मालिक झूरी हमें ढूँढ़ते हुए यहाँ ज़रूर आएगा और हमें इस कैद से वापस ले जाएगा। यदि वह न आ सका, तो हम हिम्मत नहीं हारेंगे और खुद इस काँजीहाउस की दीवार तोड़कर आज़ाद होने का संकल्प लेते हैं।
2. आज के समाचार
मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।
कैसे लिखें-
| शीर्षक दें। घटना का विवरण (कहाँ, कब, क्या हुआ)। परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया। |
(संकेत- शीर्षक ‘दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेडियाँ’)
उत्तर:
शीर्षक: दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ, काँजीहाउस से दर्जनों जानवर हुए फरार
विशेष संवाददाता | स्थानीय समाचार
घटना: बीती रात स्थानीय काँजीहाउस में बंद दो बलशाली बैलों (हीरा और मोती) ने भूख और अत्याचार से तंग आकर अपनी सींगों के प्रहार से कच्ची दीवार को ढा दिया।
परिणाम: दीवार गिरते ही बाड़े में बंद तीन घोड़ियाँ, कई बकरियाँ और भैंसें तुरंत भाग निकलीं। यद्यपि हीरा के बँधे होने के कारण मोती भी नहीं भागा और दोनों पुन: पकड़ लिए गए, पर उनके इस अदम्य साहस से दर्जनों बेज़ुबान प्राणियों की जान बच गई। ग्रामीणों ने उनके इस साहस की जमकर सराहना की।
3. कहानी का नया अंत
यदि बैल वापस न लौटते तो कहानी का अंत कैसे होता? कहानी का नया अंत लिखिए।
कैसे लिखें-
| बैलों की नई जगह। झूरी की स्थिति। |
(संकेत – “हीरा और मोती अब एक बूढ़े किसान के घर शांति से रह रहे हैं।”)
उत्तर:
नया अंत: कसाई से छूटकर भागे हीरा और मोती एक दूरदराज़ के गाँव पहुँच गए। वहाँ एक दयालु बूढ़े किसान ने उन्हें सहारा दिया और अपने बच्चों की तरह प्रेम व हरा चारा दिया। हीरा-मोती अब उस किसान के घर खुशी-खुशी रहने लगे।
उधर झूरी दिन-भर अपने बैलों की राह तकता रहा। उनके न लौटने पर वह उदास रहने लगा और खाना-पीना छोड़ दिया, पर उसे संतोष था कि उसके बैल कसाई के हाथ नहीं चढ़े।
4. चित्रकथा लेखन
नीचे ‘दो बैलों की कथा’ की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए।
कैसे लिखें-
| हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए। दृश्य का क्रम – बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आजादी। |
(संकेत- चित्र 4: “अब हम आजाद हैं।”)
उत्तर:
| चित्र 1 (काँजीहाउस में बंद होना): |
संवाद:
हीरा: “यह कैसा स्वामी है? यहाँ तो खाने को एक तिनका भी नहीं है।”
मोती: “मुझे तो लगता है, यहाँ हमारे प्राण निकल जाएँगे।”
| चित्र 2 (भागने की योजना): |
संवाद:
हीरा: “इतनी जल्दी हिम्मत मत हारो भाई, आओ दीवार तोड़ने का प्रयास करते हैं।”
मोती: “हाँ, दीवार कच्ची है, अपने सींगों से ज़ोर लगाते हैं!”
| चित्र 3 (दीवार तोड़ना): |
संवाद:
मोती: “लो! ज़ोर मारा तो दीवार गिर गई, अब सब भाग जाओ!”
अन्य जानवर: “दीवार टूट गई, चलो जल्दी बाहर निकलो!”
| चित्र 4 (जानवरों की आजादी): |
संवाद:
अन्य जानवर: “अब हम आज़ाद हैं! धन्यवाद बहादुर दोस्तों!”
मोती: “इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई।”
व्याकरण की बात – (पेज 25 के प्रश्न उत्तर)
कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
उत्तर:
शब्द – मेरा अनुमान – शब्दकोश (अर्थ)
1. उजड्डपन – घमंडी – (अशिष्टता उद्दंडता)
2. विषाद – निराशा – (उदासी, अवसाद)
3. ग्रास – भोजन या शिकारी – (कौर या निवाला)
4. उन्मत्त – पागल जैसा – (मतवाला, सनकी)
5. बेतहाशा – बहुत ज्यादा – (बहुत तेजी से)
2. कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-
1. “झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।”
मुहावरा: दाँतों पसीना आना
अर्थ: बहुत कठिन परिश्रम करना / अत्यधिक कठिन काम होना
वाक्य: गणित के कठिन प्रश्नों को हल करने में रोहन को दाँतों पसीना आ गया।
2. “उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।”
मुहावरा: दिल काँप उठना
अर्थ: बहुत अधिक डर जाना या भयभीत होना
वाक्य: अचानक जंगल में शेर की दहाड़ सुनकर यात्रियों का दिल काँप उठा।
3. “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।”
मुहावरा: जल उठना
अर्थ: ईर्ष्या होना या बहुत अधिक क्रोधित होना
वाक्य: पड़ोसी की नई कार देखकर सोहन मन ही मन जल उठा।
4. “मोती दिल में ऐंठकर रह गया।”
मुहावरा: दिल में ऐंठकर रह जाना (ऐंठकर रह जाना)
अर्थ: मन ही मन गुस्सा दबाकर रह जाना / लाचार होकर क्रोध सहना
वाक्य: पिताजी के डाँटने पर रमेश कुछ न कह सका और बस दिल में ऐंठकर रह गया।
5. “आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखें कैसे ले जाता है।”
मुहावरा: खबर लेना
अर्थ: सजा देना या सबक सिखाना
वाक्य: जब चोर दोबारा मोहल्ले में आया, तो लोगों ने उसकी अच्छी तरह खबर ली।
6. “जी तोडकर काम करते हैं. किसी से लडाई-झगडा नहीं करते. चार बाते सुनकर गम खा जाते हैं।”
मुहावरा 1: जी तोड़कर काम करना
अर्थ: अत्यधिक मेहनत करना
वाक्य: परीक्षा में प्रथम आने के लिए सुमित जी तोड़कर काम कर रहा है।
मुहावरा 2: गम खा जाना
अर्थ: सह लेना या चुपचाप दुख/अपमान बर्दाश्त कर लेना
वाक्य: बुद्धिमान व्यक्ति छोटी-मोटी बातों पर उलझने के बजाय गम खा जाते हैं।
7. “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।”
मुहावरा: ईंट का जवाब पत्थर से देना
अर्थ: कड़ा मुकाबला करना या दुष्टता का करारा जवाब देना
वाक्य: भारतीय सैनिकों ने दुश्मन की गोलाबारी का ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
8. “तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।”
मुहावरा: नौ-दो ग्यारह होना
अर्थ: भाग जाना / रफूचक्कर होना
वाक्य: पुलिस को आते देखकर चोर माल छोड़कर नौ-दो ग्यारह हो गए।
गतिविधियाँ – (पेज 26 के प्रश्न उत्तर)
1. नीचे दी गई गतिविधियाँ अपने समूह के साथ मिलकर कीजिए-
कविता (गीत) और अभिनंदन-पत्र
“बाल-सभा ने निश्चय किया, दोनों पशुवीरों को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।”
(क) मान लीजिए कि बाल-सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। अपनी कल्पना से वह गीत लिखिए।
उत्तर:
वीर हमारे हीरा-मोती, दोनों भारत माँ के शान ।
वे हैं सच्ची मित्रता के प्रतीक, दोनों दया-निधान ।
ना डरे किसी भी संकट से, ना सहे अत्याचार ।
सब जानवरों को बचाए, काँजीहाउस की तोड़कर दीवार ।
झूरी के प्यारे हीरा-मोती, आज़ादी के मूक दीवाने।
गाता है पूरा गाँव, अब इनकी वीरता के गाने!
(ख) हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र लिखिए।
उत्तर: प्रिय
वीर हीरा और मोती जी !
हम सब बाल-सभा के सदस्य आपकी असीम वीरता, स्वाभिमान और अटूट मित्रता को प्रणाम करते हैं। आपने विपत्ति के हर समय में एक-दूसरे का साथ निभाया, साँड़ को पराजित किया और काँजीहाउस की दीवार तोड़कर दर्जनों बेज़ुबान प्राणियों के प्राणों की रक्षा की। आपका जीवन हमें यह सिखाता है कि अत्याचार सहना पाप है और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करना सबसे बड़ा धर्म है।
हम आपके सुखी व सुरक्षित जीवन की कामना करते हैं।
2. बाल सभा में भाषण
मान लीजिए कि आपको बाल-सभा ने हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के लिए बुलाया है। भाषण का विषय है— ‘पशुओं के अधिकार’। अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
आदरणीय शिक्षकगण और मेरे सहपाठियों,
आप सभी को मेरा प्रणाम! आज हीरा और मोती के लौटने पर हम यहाँ ‘पशुओं के अधिकार’ पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं।
पशु भी हमारी तरह ही सजीव प्राणी हैं। उनके पास भी भावनाएँ, भूख, दर्द और प्यार की प्यास होती है। ‘दो बैलों की कथा’ कहानी हमें सिखाती है कि पशुओं पर अत्याचार करना या उन्हें भूखा रखना अधर्म है। हमारा कर्तव्य है कि हम पशुओं के प्रति दया रखें, उन्हें समय पर भोजन-पानी दें, उनसे उनकी क्षमता से अधिक काम न लें और उन्हें आत्मीयता से रखें। आइए, आज हम सब संकल्प लें कि हम किसी भी पशु पर अत्याचार नहीं होने देंगे और सभी प्राणियों की सेवा करेंगे।
धन्यवाद!
3. शीर्षक
इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
उत्तर:
भाग 1: हीरा-मोती का परिचय
भाग 2: अत्याचार और प्रेम का बंधन
भाग 3: साँड़ से मुकाबला
भाग 4: कैद और आज़ादी
भाग 5: वापसी
मेरी पहेली
अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों—
(हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी)
उत्तर:
पहेली:
शांत और सहनशील हूँ,
नियमों का पालन करता हूँ।
मोती का मैं मित्र अनोखा,
अन्याय से नहीं डरता और ना देता किसी को धोखा।
बताओ मैं कौन हूँ?
उत्तर: हीरा
पहेली:
बैलों से जो स्नेह जताए,
चरनी पर चोकर खिलाए।
बैलों का जो सच्चा मालिक,
बताओ वो कौन कहलाये ?
उत्तर: झूरी
पहेली:
थोड़ा उग्र पर सच्चा हूँ,
ईंट का जवाब पत्थर से दूँ ।
काँजीहाउस की दीवार तोड़कर,
जो साथियों को आज़ादी दिलाये।
बताओ वो कौन कहलाये ?
उत्तर: मोती
पहेली:
झूरी का मैं साला कहलाता,
बैलों पर मैं डंडे बरसाता।
सूखा भूसा सामने देता,
बताओ मेरा नाम क्या था?
उत्तर: गया
पहेली:
कंधों से मैं हल चलाऊ,
खेतों में मैं काम आऊ।
कृषि संस्कृति का आधार हूँ मैं,
बताओ मैं कौन हूँ ?
उत्तर: बैल
पहेली:
हरी हूँ, दानों से भरी हूँ,
खेत में खड़ी लहलहाती हूँ।
जिसे देखकर हीरा-मोती की बढ़ जाती भूख ।
बताओ मैं कौन हूँ ?
उत्तर: मटर
पहेली:
गले में हूँ, तो बंधन बन जाऊं,
झटके से खींचो तो मैं टूट जाऊं ।
बताओ क्या हूँ मैं ?
उत्तर: रस्सी
