In the First Chapter of Class 9 Hindi Ganga (2026–27) Chapter 1 “दो बैलों की कथा” is written by Munshi Premchand (मुंशी प्रेमचंद). It tells the story of two oxen, Heera and Moti (हीरा और मोती), who display deep friendship, loyalty and courage. The chapter shows how animals also have emotions and value freedom. Through their struggles and determination, the story teaches moral values like kindness, unity and dignity, making it meaningful. (दो बैलों की कथा – दया, एकता और गरिमा जैसे नैतिक मूल्यों की शिक्षा देती है, जो इसे विद्यार्थियों के लिए सार्थक और प्रेरणादायक बनाती है।)
CBSE क्लास 9 हिंदी गंगा चैप्टर 1 दो बैलों की कथा सॉल्यूशंस बोलो !
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
मेरे उत्तर मेरे तर्क – (पेज 16 के प्रश्न उत्तर)
1. कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
(क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(ख) एकता और सहयोग
(ग) गर्व और दंभ
(घ) विद्रोह और क्रोध
सही उत्तर: (ख) एकता और सहयोग ।
उत्तर: हीरा और मोती का संबंध निस्वार्थ प्रेम, गहरी एकता और अटूट सहयोग को दर्शाता है। वे संकट के समय एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ते और मिलकर हर मुसीबत का डटकर सामना करते हैं।
विस्तृत व्याख्या: कहानी में हीरा और मोती के बीच का आपसी संबंध अटूट एकता और सहयोग का प्रतीक है। वे केवल पशु नहीं, बल्कि सच्चे मित्रों की तरह व्यवहार करते हैं। जब भी उन पर कोई मुसीबत आती है, जैसे गया के घर से भागना हो या सांड से लड़ना, वे अपनी एकजुटता से ही विजयी होते हैं। उनका यह सहयोग दर्शाता है कि यदि साथ मिलकर प्रयास किया जाए, तो सबसे कठिन परिस्थितियों को भी जीता जा सकता है।
2. हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
(क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
(घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
सही उत्तर: (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा।
उत्तर: हीरा और मोती अपने मालिक झूरी से बेहद प्यार करते थे। जब उन्हें झूरी के साले गया के साथ भेजा गया, तो उन्हें लगा कि उनके मालिक ने उन्हें बेच दिया है, जो उन्हें अपमानजनक लगा।
विस्तृत व्याख्या: बैलों ने गया के घर को अपना नया स्थान इसलिए स्वीकार नहीं किया क्योंकि वे झूरी के प्रति वफादार थे। उन्हें गलतफहमी हुई कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है। उनके आत्मसम्मान को इस बात से गहरी चोट पहुँची कि जिस मालिक की उन्होंने जी-जान से सेवा की, उसने उन्हें त्याग दिया। इसी अपमानबोध और अपने पुराने घर के प्रति लगाव के कारण उन्होंने गया के यहाँ चारा-पानी को हाथ तक नहीं लगाया।
3. बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
(क) कष्टों से बचने के लिए
(ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(ग) अभिमान की रक्षा के लिए
(घ) अपनापन पाने के लिए
सही उत्तर: (घ) अपनापन पाने के लिए।
उत्तर: गया के यहाँ बैलों को न तो प्यार मिला और न ही सम्मान। उन्हें रूखा-सूखा भूसा दिया गया और अपमानित किया गया। अतः अपने पुराने घर का अपनापन पाने के लिए उन्होंने रस्सियाँ तोड़ दीं।
विस्तृत व्याख्या: गया के घर में हीरा और मोती को परायापन महसूस हो रहा था। वहां उन्हें दिन भर कठिन परिश्रम कराया जाता और खाने को केवल सूखा भूसा दिया जाता था। इसके विपरीत, झूरी के पास उन्हें प्रेम और सम्मान मिलता था। गया के यहाँ हो रहे दुर्व्यवहार और अपमान ने उन्हें विद्रोह करने पर मजबूर कर दिया। अंततः, अपने वास्तविक घर की सुखद स्मृतियों और अपनापन पाने की तीव्र इच्छा के कारण उन्होंने रस्सियाँ तोड़कर भागने का निर्णय लिया।
4. गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का घोतक है?
(क) स्वाभिमान
(ख) अहिंसा
(ग) पराधीनता
(घ) अन्याय की रक्षा
सही उत्तर: (क) स्वाभिमान।
उत्तर: मोती का गुस्सा उसके स्वाभिमानी स्वभाव को प्रकट करता है। वह अन्याय को चुपचाप सहने के बजाय उसका विरोध करना जानता है। यह आक्रोश अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की मानवीय प्रवृत्ति का परिचायक है।
विस्तृत व्याख्या: जब गया मोती को डंडे से मारता है, तो मोती का भड़कना उसके गहरे स्वाभिमान और आत्म-सम्मान को दर्शाता है। यह मानवीय प्रवृत्ति है कि कोई भी जीव निरंतर होने वाले अन्याय और शारीरिक शोषण को लंबे समय तक सहन नहीं कर सकता। मोती का आक्रोश यह संदेश देता है कि गुलामी की बेड़ियों में जकड़े होने के बावजूद, अपने अधिकारों और सम्मान के लिए आवाज उठाना या विद्रोह करना जीवित होने का सबसे बड़ा प्रमाण है।
5. कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
(क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए
(ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
(घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
सही उत्तर: (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए।
उत्तर: प्रेमचंद ने ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग यह दिखाने के लिए किया है कि पशुओं में भी मनुष्यों जैसी गहरी संवेदनाएं और चेतना होती है। वे बिना बोले भी एक-दूसरे के सुख-दुख को भली-भांति समझते हैं।
विस्तृत व्याख्या: लेखक ने बैलों की मूक-भाषा के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि संवाद के लिए शब्दों की आवश्यकता अनिवार्य नहीं है। हीरा और मोती आँखों के इशारों और शरीर की भंगिमाओं से एक-दूसरे के विचारों को समझ लेते थे। यह उनकी उच्च स्तरीय चेतना और भावनात्मक जुड़ाव को प्रदर्शित करता है। इसके द्वारा लेखक पाठकों को यह समझाना चाहते हैं कि पशु भी प्रेम, घृणा, त्याग और विद्रोह जैसी मानवीय भावनाओं को गहराई से अनुभव करते हैं।
6. “दो बैलों की कथा” को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
(क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
(ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के
इस प्रसिद्ध कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद ने अपने पात्रों के माध्यम से गहरे सामाजिक और राष्ट्रीय भाव भी व्यक्त किए हैं।
सही उत्तर: (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के।
उत्तर: हीरा और मोती पराधीन भारत की उस जनता के प्रतीक हैं जो आजादी के लिए संघर्ष कर रही थी। उनकी बार-बार कैद होना और भागना भारतीयों के स्वतंत्रता पाने के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
विस्तृत व्याख्या: यदि इस कहानी को ऐतिहासिक संदर्भ में देखें, तो हीरा और मोती उन भारतीय क्रांतिकारियों और आम जनता के प्रतीक हैं जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध लंबी लड़ाई लड़ी। जिस प्रकार बैल बार-बार बाधाओं को पार कर अपने घर (स्वतंत्रता) पहुँचने की कोशिश करते हैं, वैसे ही भारतीय जनता ने भी अनेक कष्ट सहकर स्वराज का मार्ग चुना। यह कहानी सिखाती है कि आजादी आसानी से नहीं मिलती, इसके लिए निरंतर संघर्ष, एकता और बलिदान की आवश्यकता होती है।
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए-
मेरी समझ मेरे विचार – (पेज 17 के प्रश्न उत्तर)
1. “दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
उत्तर: बैल अपने पुराने मालिक झूरी से बहुत प्रेम करते थे। गया के यहाँ उन्हें अपनापन नहीं मिला और उन्हें लगा कि उन्हें बेच दिया गया है। इसी विरोध और दुख के कारण उन्होंने पाँव न उठाने की कसम खा ली।
विस्तृत व्याख्या: हीरा और मोती गया के यहाँ काम न करके अपना विरोध प्रदर्शित कर रहे थे। बैलों के लिए झूरी केवल मालिक नहीं, बल्कि उनके परिवार का हिस्सा था। जब उन्हें गया के साथ भेजा गया, तो उनके स्वाभिमान को गहरी चोट पहुँची। उन्हें लगा कि झूरी ने उनका साथ छोड़ दिया है और उन्हें किसी अजनबी को बेच दिया है। गया का व्यवहार भी उनके प्रति रूखा और क्रूर था। इसी कारण, अपनी वफादारी सिद्ध करने और अन्याय का प्रतिकार करने के लिए उन्होंने हल में जोते जाने के बावजूद एक कदम भी आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया।
2. “गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है कैसे? (संकेत—वे क्यों लौट आए, उनके और झूरी के मन में कौन-कौन से भाव रहे होंगे, क्या वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है आदि।)
उत्तर: यह घटना असाधारण थी क्योंकि पशुओं का कोसों दूर से रास्ता ढूँढकर वापस आना उनके तीव्र बुद्धिमत्ता और वफादारी को दर्शाता है। यह उनके और झूरी के बीच के उस गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रमाण था जो वास्तविक जीवन में दुर्लभ है।
विस्तृत व्याख्या: बैलों का गया के चंगुल से भागकर वापस झूरी के द्वार पर आना प्रेम की शक्ति को दर्शाता है। पशुओं में दिशा का इतना सटीक ज्ञान और अपने घर के प्रति इतनी व्याकुलता साधारण नहीं होती। झूरी ने जब उन्हें देखा, तो उसकी आँखों में खुशी के आँसू थे, जो यह बताते हैं कि उनका संबंध केवल आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक था। वास्तविक जीवन में भी पालतू पशु अक्सर अपने दयालु मालिकों के प्रति ऐसी ही निष्ठा दिखाते हैं। यह घटना समाज को संदेश देती है कि प्रेम और सम्मान पाकर मूक प्राणी भी कठिन से कठिन बाधाएं पार कर लौट आते हैं।
3. “मोती ने मूक-भाषा में कहा— अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” “कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है” इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
उत्तर: कहानी में जब गया बैलों पर अत्याचार करता है और जब सांड उन पर हमला करता है, तब हीरा-मोती संघर्ष का रास्ता चुनते हैं। बिना संघर्ष के वे न तो गया से बच पाते और न ही सांड पर विजय प्राप्त कर पाते।
विस्तृत व्याख्या: प्रेमचंद जी ने यह स्पष्ट किया है कि अत्याचार सहना उसे बढ़ावा देना है। हीरा और मोती ने कांजीहौस की दीवार तोड़कर अन्य पशुओं को आजाद कराया, जो संघर्ष की अनिवार्यता का सबसे बड़ा उदाहरण है। सांड जैसी बड़ी मुसीबत का सामना भी उन्होंने मिलकर किया। यदि वे संघर्ष न करते, तो दड़ियल कसाई के हाथों उनका अंत निश्चित था। यह कहानी सिद्ध करती है कि जब स्वतंत्रता और जीवन पर संकट आए, तो मूक बनकर सहने के बजाय संगठित होकर लड़ना ही एकमात्र विकल्प होता है। संघर्ष ही अंततः आत्म-सम्मान और आजादी का मार्ग प्रशस्त करता है।
4. “जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया….” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
उत्तर: हीरा और मोती मुख्य रूप से ‘अपनापन’ की भावना से प्रेरित थे। यद्यपि वे स्वतंत्र होना चाहते थे, लेकिन उनकी आजादी का अंतिम लक्ष्य झूरी का घर और उसका स्नेह पाना ही था, जिसके लिए उन्होंने अनेक कष्ट सहे।
विस्तृत व्याख्या: कहानी का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बैलों के लिए ‘अपनापन’ स्वतंत्रता से भी ऊपर था। कांजीहौस से भागने के बाद भी वे जंगल में नहीं बसे, बल्कि वापस झूरी के पास आए। उन्हें स्वतंत्रता इसलिए चाहिए थी ताकि वे गया जैसे क्रूर लोगों के चंगुल से निकलकर वापस उस स्थान पर जा सकें जहाँ उन्हें प्यार मिलता था। झूरी का माथा सहलाना और उसे अपना घर मानना ही उनकी प्रेरणा का असली स्रोत था। अतः उनकी हर कोशिश और हर लड़ाई उस खोए हुए अपनेपन और सुरक्षा को दोबारा पाने के लिए ही समर्पित थी।
5. “बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी”, “अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है”- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
उत्तर: मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। अत्याचार सहने से अत्याचारी का मनोबल बढ़ता है। यदि हीरा और मोती गया की मार चुपचाप सहते रहते, तो वह उन पर और अधिक क्रूरता करता। विरोध ही अन्याय का अंत करता है।
विस्तृत व्याख्या: समाज में चुप्पी को अक्सर कमजोरी समझा जाता है। जब हम अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाते, तो हम परोक्ष रूप से गलत करने वाले का साथ दे रहे होते हैं। कहानी में हीरा और मोती ने बार-बार विद्रोह करके यह दिखाया कि वे अपमानजनक जीवन स्वीकार नहीं करेंगे। यदि वे कांजीहौस में चुपचाप अपनी बारी का इंतज़ार करते, तो शायद कभी मुक्त नहीं हो पाते। अन्याय का प्रतिरोध करना न केवल अपना बचाव है, बल्कि समाज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। विद्रोह की आग ही शोषण करने वालों के मन में डर पैदा करती है।
6. “बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अच्छे मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।
उत्तर: पहली घटना सांड से मुकाबला है जहाँ दोनों ने मिलकर लड़ाई लड़ी। दूसरी, कांजीहौस में मोती का हीरा को छोड़कर न भागना। तीसरी, नांद में एक साथ मुँह डालना और एक साथ ही बाहर निकालना उनके गहरे भाईचारे को दर्शाता है।
विस्तृत व्याख्या: हीरा और मोती की मित्रता के कई उदाहरण कहानी में मिलते हैं। जब सांड ने हमला किया, तो दोनों ने सूझबूझ से आगे-पीछे वार किया। दूसरी महत्वपूर्ण घटना तब घटी जब कांजीहौस की दीवार टूटने के बाद हीरा बंधा रह गया, तो मोती उसे अकेला छोड़कर नहीं भागा और पकड़ा जाना स्वीकार किया। इसके अलावा, खेत में काम करते समय वे हमेशा कोशिश करते थे कि सारा बोझ उनके कंधे पर रहे ताकि मित्र को कम कष्ट हो। ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि उनकी दोस्ती केवल सुख की नहीं बल्कि त्याग और बलिदान की ऊँची मिसाल थी।
7. “उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
उत्तर: मालकिन का व्यवहार शुरू में कठोर और स्वार्थी था, उन्होंने बैलों को नमकहराम कहा। इसके विपरीत, छोटी लड़की ममतामयी थी जो अपनी रोटियाँ खिलाकर बैलों का दुख बाँटती थी। अंत में मालकिन के व्यवहार में भी परिवर्तन आया और उन्होंने स्नेह दिखाया।
विस्तृत व्याख्या: मालकिन और छोटी लड़की के व्यवहार में जमीन-आसमान का अंतर है। मालकिन बैलों को केवल एक संपत्ति मानती थीं और उनके भागने पर क्रोधित हुईं। वहीं छोटी लड़की, जो खुद माँ के वियोग का दुख झेल रही थी, बैलों के कष्ट को महसूस कर सकी। उसने अपनी ममता से बैलों की भूख मिटाई और उन्हें आजाद किया। हालांकि, कहानी के अंत में जब बैल वापस आए, तो मालकिन का हृदय भी पसीज गया और उन्होंने उनके माथे चूम लिए। यह दर्शाता है कि जहाँ लड़की का प्रेम निस्वार्थ था, वहीं मालकिन का स्नेह उनके घर लौटने की खुशी और पश्चाताप से उपजा था।
मेरी कल्पना मेरे अनुमान – (पेज 18 के प्रश्न उत्तर)
1. “उसने उनके माथे सहलाए और बोली— खोल देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
उत्तर: यदि मैं वह छोटी लड़की होता, तो मैं भी बैलों को रोटियाँ खिलाता और उनकी रस्सी खोल देता। साथ ही, मैं घर के बड़ों को यह समझाने की कोशिश करता कि पशुओं को प्यार और भरपेट भोजन की ज़रूरत होती है।
विस्तृत व्याख्या: छोटी लड़की के स्थान पर होने पर मेरा हृदय भी उन बेजुबान पशुओं के लिए करुणा से भर जाता। मैं उन्हें गया की क्रूरता से बचाने के लिए न केवल उनके बंधन खोल देता, बल्कि उनके भागने के रास्ते में कुछ चारा भी रख देता ताकि वे भूखे न रहें। मैं चुपके से यह सुनिश्चित करता कि गया को उनके भागने का तुरंत पता न चले। साथ ही, मैं अपने पिता या घर के अन्य सदस्यों से उनकी वकालत करता ताकि उन्हें दोबारा ऐसे किसी स्थान पर न भेजा जाए जहाँ उन्हें प्रेम और सम्मान न मिल सके।
2. “दोनों गधे अभी तक क्यों-के-क्यों खड़े थे” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।
उत्तर: मैं इस कथन से सहमत हूँ। कांजीहौस में गधे इसी भय के कारण नहीं भागे कि वे फिर से पकड़े जा सकते हैं। अक्सर हम भी असफल होने के डर से सुनहरे अवसरों का लाभ नहीं उठा पाते और जकड़े रहते हैं।
विस्तृत व्याख्या: मनुष्य और पशु दोनों में भय की भावना विकास की राह में बाधा बनती है। कहानी में गधे आज़ाद होने का मौका मिलने पर भी वहीं खड़े रहे क्योंकि उन्हें पकड़े जाने और मार खाने का डर था। असल जिंदगी में भी कई बार हमारे पास आगे बढ़ने के अवसर होते हैं, लेकिन संकोच और “लोग क्या कहेंगे” या “अगर मैं हार गया तो” जैसे विचार हमें रोक देते हैं। यह मानसिक बेड़ियाँ लोहे की जंजीरों से भी अधिक मजबूत होती हैं। प्रगति वही कर पाता है जो इस डर को त्याग कर जोखिम उठाने का साहस दिखाता है।
मेरे अनुभव मेरे विचार – (पेज 18 के प्रश्न उत्तर)
1. “दोस्ती में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।
उत्तर: जी हाँ, सच्ची दोस्ती में औपचारिकता नहीं होती। छोटे-मोटे झगड़े और मज़ाक दोस्ती को और गहरा बनाते हैं। बिना किसी हक या शरारत के दोस्ती केवल एक परिचय बनकर रह जाती है, जिसमें विश्वास की कमी होती है।
विस्तृत व्याख्या: मेरी राय में घनिष्ठ मित्रता वही है जहाँ हम बिना डरे अपने मित्र से लड़ सकें या मज़ाक कर सकें। हीरा और मोती भी एक-दूसरे को चाटते और सींग मिलाते थे, जो उनकी मस्ती का तरीका था। जब दो मित्रों के बीच बहुत अधिक शिष्टाचार होता है, तो वह रिश्ता थोड़ा बनावटी लगने लगता है। धौल-धप्पा और हल्की तकरार यह दर्शाती है कि हम एक-दूसरे के साथ सहज हैं और हमें बुरा लगने का डर नहीं है। मेरे अनुभव में भी, जिन मित्रों के साथ मैंने सबसे ज़्यादा मज़ाक किया, वही आज संकट के समय सबसे पहले खड़े मिलते हैं।
2. “हीरा ने तिरस्कार किया— गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए”, “यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे” आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं – हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?
उत्तर: मैं दोनों के साथ हूँ क्योंकि वे एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हीरा धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक है, जबकि मोती जोश और क्रांति का। जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए कभी धैर्य तो कभी संघर्ष की आवश्यकता होती है।
विस्तृत व्याख्या: हीरा और मोती की जोड़ी संपूर्णता का प्रतीक है। हीरा हमें सिखाता है कि युद्ध में भी मर्यादा का पालन करना चाहिए, जैसे गिरे हुए शत्रु पर वार न करना। वहीं मोती हमें सिखाता है कि अन्याय के विरुद्ध आक्रोश दिखाना और लड़ना जीवित होने की निशानी है। यदि केवल हीरा होता, तो शायद वे कभी गया के बंधन से मुक्त न होते, और यदि केवल मोती होता, तो वे मर्यादा खो देते। इसलिए, मैं दोनों के विचारों का समर्थन करता हूँ क्योंकि आदर्शवादी नीति और व्यावहारिक क्रांति का मेल ही किसी भी बड़ी सफलता का आधार बनता है।
3. “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।
उत्तर: हाँ, एक बार विद्यालय की एक कठिन प्रतियोगिता के दौरान मेरे मित्र और मैंने मिलकर काम किया। जब हम हारने वाले थे, तब हमने एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाया और अंततः कठिन परिश्रम से उस चुनौती को जीत लिया।
विस्तृत व्याख्या: मुझे याद है जब हमारी फुटबॉल टीम एक महत्वपूर्ण मैच में पिछड़ रही थी, तब मेरे सबसे प्रिय मित्र ने मुझे हार न मानने की प्रेरणा दी। हम दोनों ने रणनीति बनाई और एक-दूसरे के खेल को सहारा दिया। उस समय मुझे समझ आया कि जब दो लोग एक लक्ष्य के लिए जुड़ जाते हैं, तो ताकत दोगुनी हो जाती है। ठीक हीरा और मोती की तरह, हमने भी एक-दूसरे की कमियों को ढका और खूब मेहनत की। अंत में हमारी टीम जीत गई। उस दिन के बाद हमारी मित्रता और भी अधिक प्रगाढ़ हो गई और हमने सीखा कि साथ मिलकर किसी भी मुश्किल को हल किया जा सकता है।
4. दो बैलों की कथा का सारांश लिखिए। (गंगा अध्याय 1 पाठ्य पुस्तक 2026-27)
उत्तर: CBSE कक्षा 9 के लिए हिंदी गंगा (नया एनसीईआरटी 2026-27) पहला अध्याय ‘दो बैलों की कथा’ मुंशी प्रेमचंद (Munshi Premchand) द्वारा रचित एक कालजयी कहानी है, जो मानवीय संवेदनाओं, पशुओं के अटूट प्रेम और उनके स्वाभिमान को मार्मिक रूप से प्रस्तुत करती है। यह कहानी हीरा और मोती नामक दो बैलों की है, जो अपने उदार मालिक झूरी से बेहद प्रेम करते हैं। जब उन्हें झूरी के साले गया के साथ जबरन भेजा जाता है, तो वे अपमान और वियोग के कारण विद्रोह कर देते हैं। गया के यहाँ उनके साथ क्रूर व्यवहार किया जाता है, जिससे वे रस्सियाँ तोड़कर भाग निकलते हैं। रास्ते में उन्हें कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे एक विशाल सांड से प्राणघातक मुकाबला और फिर कांजीहौस (पशु जेल) में कैद होना।
कांजीहौस की दीवार तोड़कर वे अन्य मूक पशुओं को तो आजाद कर देते हैं, लेकिन अपनी मित्रता के कारण खुद पकड़े जाते हैं। अंत में उन्हें एक कसाई को बेच दिया जाता है, जहाँ से वे अपनी सूझबूझ और वफादारी के बल पर भागकर पुनः अपने प्रिय मालिक झूरी के पास पहुँच जाते हैं।
यह कहानी सिखाती है कि स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, उसके लिए बार-बार संघर्ष और अटूट एकता की आवश्यकता होती है।
मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित ‘दो बैलों की कथा’ अध्याय के मुख्य बिंदु:
• पशु-मानव संबंध: कहानी झूरी और उसके बैलों के बीच के गहरे भावनात्मक और प्रेमपूर्ण संबंध को उजागर करती है।
• पराधीनता का विरोध: हीरा और मोती गया के अत्याचारों को चुपचाप सहने के बजाय बार-बार विद्रोह करके अपनी असहमति प्रकट करते हैं।
• सच्ची मित्रता और एकता: सांड से लड़ते समय और कांजीहौस में कैद के दौरान दोनों मित्र एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ते।
• स्वतंत्रता का संघर्ष: यह कहानी परोक्ष रूप से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ओर संकेत करती है, जहाँ आज़ादी के लिए निरंतर लड़ना पड़ता है।
• अन्याय के विरुद्ध आवाज़: कांजीहौस की दीवार तोड़ना यह संदेश देता है कि संगठित होकर किसी भी व्यवस्था के अन्याय को समाप्त किया जा सकता है।
चर्चा आधारित प्रश्न (Discussion Based Questions) – (पेज 21 के प्रश्न उत्तर)
1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
उत्तर: बैलों का काँजीहाउस में बंद होना सामाजिक व्यवस्था के दो चेहरों को दिखाता है। कानूनी रूप से यह न्याय था क्योंकि उन्होंने दूसरे किसान के मटर के खेत को चरकर नुकसान पहुँचाया था, जिसके हर्जाने के तौर पर उन्हें कैद किया गया। परंतु, मानवीय और नैतिक दृष्टिकोण से यह घोर अन्याय था। काँजीहाउस में पशुओं को भूखा-प्यासा रखना, उन पर लाठियाँ बरसाना और अंत में कसाई को बेच देना कानून के नाम पर बेजुबान जीवों के साथ क्रूरता और घोर शोषण को दर्शाता है।
2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
उत्तर: यदि मुझे अवसर मिले, तो मैं बैलों और सभी मूक पशुओं के लिए निम्नलिखित कानूनी अधिकारों की माँग करूँगा। सबसे पहले, उनके साथ होने वाली किसी भी शारीरिक क्रूरता और अत्यधिक काम के बोझ के खिलाफ कड़ा कानून होना चाहिए। दूसरा, काँजीहाउस जैसी जगहों पर उनके लिए पर्याप्त भोजन, साफ पानी और चिकित्सीय देखभाल को अनिवार्य संवैधानिक अधिकार बनाया जाए। तीसरा, काम करने वाले पशुओं के लिए भी विश्राम का समय तय हो और बूढ़े या बीमार होने पर उन्हें कसाई को बेचना पूरी तरह गैरकानूनी घोषित हो।
कल्पना आधारित प्रश्न (Imagination-Based Questions) – (पेज 22 के प्रश्न उत्तर)
1. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए। (संकेत – “थानाध्यक्ष महोदय, हमारा नाम… है। हमारे साथ अन्याय हुआ है…।”)
उत्तर: सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
थाना – झूरी का काँठा
दिनांक: 16 मई 2026
विषय: गया द्वारा किए गए अत्याचार और काँजीहौस में बंद किए जाने की शिकायत।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हम झूरी काछी के पालतू बैल हीरा और मोती हैं। हमारे मालिक हमसे बहुत प्रेम करते हैं, परंतु कुछ दिन पहले उनके साले गया हमें अपने घर ले गए। वहाँ हमसे दिन-रात कठोर काम कराया गया तथा विरोध करने पर डंडों से मारा गया। हमें खाने के लिए केवल सूखा भूसा दिया जाता था।
बाद में मटर के खेत में पकड़कर हमें काँजीहौस में बंद कर दिया गया, जहाँ कई दिनों से हमें पर्याप्त चारा-पानी भी नहीं मिल रहा है। हमें भय है कि हमें कसाई को बेच दिया जाएगा।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि हमें इस कष्ट से मुक्त कराकर हमारे वास्तविक मालिक झूरी के पास पहुँचाने की कृपा करें।
भवदीय,
हीरा और मोती
(झूरी काछी के बैल)
महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions):
प्रश्न 1. दो बैल की कथा कहानी के आधार पर झूरी के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: झूरी के चरित्र की विशेषताएँ:
सच्चा पशु-प्रेमी: झूरी अपने बैलों (हीरा-मोती) से बच्चों की तरह प्यार करता था। वह उन्हें कभी मारता-पीटता नहीं था, बल्कि सहलाकर रखता था।
संवेदनशील और दयालु: वह बैलों की मूक भाषा और उनकी भावनाओं को अच्छी तरह समझता था। उनके सुख-दुख में वह हमेशा उनके साथ खड़ा रहता था।
स्वाभिमानी और संतोषी: झूरी एक सीधा-साधा किसान था। वह बैलों की मेहनत का सम्मान करता था और उन्हें कभी भूखा या बेसहारा नहीं छोड़ना चाहता था।
क्षमाशील स्वभाव: जब बैल गया के यहाँ से भागकर वापस आ गए, तो झूरी ने उनसे नाराज होने के बजाय उन्हें गले लगा लिया और उनका स्वागत किया।
प्रश्न 2. दो बैल की कथा कहानी के आधार पर गया के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: गया के चरित्र की विशेषताएँ:
क्रूर और संवेदनहीन: गया एक निर्दयी व्यक्ति था। उसे पशुओं की भावनाओं से कोई सरोकार नहीं था। वह हीरा और मोती को केवल काम की वस्तु समझता था।
अत्याचारी और शोषक: वह बैलों से दिनभर खेतों में कठिन और थका देने वाला काम करवाता था, लेकिन बदले में उन्हें केवल सूखा भूसा खाने को देता था।
क्रोधी और हिंसक: बैलों द्वारा विरोध करने पर वह तुरंत हिंसक हो जाता था। उसने हीरा की नाक पर डंडे से कड़ा प्रहार भी किया था।
अहंकारी स्वभाव: गया अपनी बात ऊपर रखने के लिए बैलों पर जबरदस्ती हुक्म चलाता था। उसके इसी व्यवहार के कारण बैल उससे नफरत करते थे।
प्रश्न 3. दो बैल की कथा कहानी के आधार पर झूरी की पत्नी के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: झूरी की पत्नी के चरित्र की विशेषताएँ:
जल्दबाज और क्रोधी: झूरी की पत्नी स्वभाव से थोड़ी तेज और गुस्सैल थी। जब बैल भाई के घर से भागे, तो उसने बिना सोचे-समझे उन्हें ‘नमक-हराम’ कह दिया।
पारंपरिक सोच: शुरुआत में वह पशुओं की भावनाओं को पूरी तरह नहीं समझ पाती थी। उसे लगता था कि बैल उसके भाई के यहाँ काम नहीं करना चाहते थे।
व्यवहारिक और स्वाभिमानी: वह घर के मान-सम्मान और नियमों को लेकर सख्त थी, इसलिए बैलों के वापस लौटने पर उसने उन्हें सूखा भूसा खिलाने का आदेश दिया।
परिवर्तनशील (भावुक हृदय): कहानी के अंत में जब बैल कसाई के चंगुल से बचकर वापस आए, तो उसका दिल पिघल गया। उसने स्नेह से दोनों बैलों के माथे चूम लिए।
प्रश्न 4. ‘दो बैलों की कथा’ में हीरा और मोती की मित्रता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित ‘दो बैलों की कथा’ में हीरा और मोती केवल बैल नहीं, बल्कि सच्चे मित्रों और आदर्श साथियों के प्रतीक हैं।
मूक भाषा में संवाद: हीरा और मोती इंसानी भाषा नहीं जानते थे, लेकिन वे मूक भाषा में एक-दूसरे के मन की बात और सुख-दुख को आसानी से समझ लेते थे। वे एक-दूसरे को चाटकर और सूंघकर अपना प्रेम प्रकट करते थे।
एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता: हल या गाड़ी में जोते जाने पर दोनों की यही कोशिश होती थी कि ज्यादा से ज्यादा बोझ उसके खुद के कंधे पर रहे और दूसरे साथी को कम कष्ट उठाना पड़े।
मुसीबत में साथ न छोड़ना: कांजीहौस की दीवार टूटने पर मोती अकेला भाग सकता था, लेकिन हीरा को रस्सियों से बंधा देखकर वह भी वहीं रुक गया। उसने दोस्ती की खातिर अपनी आजादी की परवाह नहीं की और कसाई के चंगुल से भागते समय भी दोनों साथ रहे।
सच्चा तालमेल (एक धीर, एक वीर): दोनों के स्वभाव अलग थे—हीरा शांत और सहनशील था, जबकि मोती गुस्सैल और विद्रोही था। इसके बावजूद संकट के समय सांड से लड़ते हुए दोनों ने गजब का तालमेल दिखाया और मिलकर उसे परास्त किया।
संतुलन का महत्व: हीरा-मोती की जोड़ी सिखाती है कि सच्ची मित्रता केवल सुख का नाम नहीं है। स्वभाव में अंतर होने पर भी यदि आपस में सम्मान, त्याग और वफादारी हो, तो दोस्ती हर मुसीबत को हरा सकती है।
दो बैलों की कथा – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: दो बैलों की कथा के लेखक कौन हैं?
उत्तर: इस कालजयी कहानी के लेखक मुंशी प्रेमचंद हैं। उन्हें ‘कथा सम्राट’ कहा जाता है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन, किसानों की समस्याओं और पशु-मानव संबंधों को अत्यंत मार्मिक ढंग से समाज के सामने रखा है।
प्रश्न 2: हीरा और मोती कौन थे?
उत्तर: हीरा और मोती दो बैल थे, जो पछाईं जाति के थे। वे देखने में सुंदर, काम में चौकस और डील में ऊँचे थे। दोनों में गहरी मित्रता थी और वे एक-दूसरे के मूक संकेतों को भली-भांति समझते थे।
प्रश्न 3: कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस कहानी का मुख्य संदेश यह है कि स्वतंत्रता सहजता से नहीं मिलती, इसके लिए निरंतर संघर्ष करना पड़ता है। साथ ही, यह पशुओं और मनुष्यों के बीच के अटूट प्रेम और वफादारी के महत्व को भी दर्शाती है।
प्रश्न 4: प्रेमचंद के दो बैलों की कहानी क्या है?
उत्तर: यह कहानी दो बैलों (हीरा और मोती) के साहस की कथा है जो शोषण के विरुद्ध विद्रोह करते हैं। वे गया के अत्याचार से भागते हैं, मटर के खेत में पकड़े जाते हैं और अंततः अपनी बुद्धि से कसाई के चंगुल से बच निकलते हैं।
प्रश्न 5: दो बैलों की कहानी का सार क्या है?
उत्तर: कहानी का सार वफादारी और संघर्ष है। हीरा-मोती अपने मालिक झूरी के प्रति समर्पित हैं। वे पराधीनता को स्वीकार नहीं करते और हर बाधा को पार कर स्वतंत्रता प्राप्त करते हैं। यह एकता में शक्ति का अनुपम उदाहरण है।
प्रश्न 6: हीरा और मोती किसके बैल थे?
उत्तर: हीरा और मोती ‘झूरी काछी’ नामक एक किसान के बैल थे। झूरी अपने बैलों से बहुत प्रेम करता था और उन्हें भरपेट चारा-पानी देता था। बैल भी अपने मालिक के प्रति पूरी तरह वफादार और समर्पित थे।
प्रश्न 7: दो बैलों की कथा पाठ का सारांश क्या है?
उत्तर: पाठ का सारांश यह है कि सच्चे मित्र विपत्ति में साथ नहीं छोड़ते। हीरा-मोती ने मिलकर सांड को हराया और कांजीहौस की दीवार तोड़ी। उनकी यह यात्रा पशुओं के स्वाभिमान और घर वापसी की भावनात्मक दास्तान है।
प्रश्न 8: ‘दो बैलों की कथा’ पाठ का सारांश लगभग 100 शब्दों में क्या है?
उत्तर: हीरा और मोती झूरी के प्यारे बैल हैं। उन्हें गया के घर भेजा जाता है जहाँ वे अपमानित महसूस करते हैं। वे वहां से भागते हैं, रास्ते में सांड से मुकाबला करते हैं और कांजीहौस में कैद होते हैं। वहां वे अन्य पशुओं को आजाद कराते हैं। अंत में एक कसाई उन्हें खरीदता है, लेकिन वे भागकर झूरी के पास लौट आते हैं। यह कहानी एकता, स्वाभिमान और निरंतर संघर्ष से प्राप्त स्वतंत्रता की महानता को रेखांकित करती है।
प्रश्न 9: ‘दो बैलों की कथा’ किसने लिखी है और यह किस पुस्तक में है?
उत्तर: यह कहानी मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई है। यह उनकी प्रसिद्ध कहानियों के संग्रह ‘मानसरोवर’ के आठ भागों में से एक में संकलित है। वर्तमान में यह कक्षा 9 की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘गंगा’ का प्रथम पाठ है।
प्रश्न 10: दो बैलों की कहानी में ‘मूक-भाषा’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: ‘मूक-भाषा’ का अर्थ है बिना बोले संकेतों से बात करना। हीरा और मोती एक-दूसरे के विचारों, दुखों और योजनाओं को आँखों और शरीर की भंगिमाओं से समझ लेते थे। यह उनके बीच के गहरे भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक है।
प्रश्न 11: ‘दो बैलों की कथा’ का स्वतंत्रता आंदोलन से क्या संबंध है?
उत्तर: यह कहानी परोक्ष रूप से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी है। हीरा-मोती का बार-बार कैद होना और विद्रोह करना पराधीन भारतीयों के संघर्ष को दर्शाता है। यह संदेश देता है कि आजादी के लिए एकजुट होकर लड़ना आवश्यक है।
प्रश्न 12: हीरा और मोती में से अधिक समझदार कौन था?
उत्तर: हीरा को अधिक समझदार और धैर्यवान माना गया है। वह सहनशील था और नीतिगत फैसले लेता था, जैसे शत्रु पर सींग न चलाना। मोती स्वभाव से उग्र और विद्रोही था, जबकि हीरा संयम से काम लेता था।
प्रश्न 13: प्रेमचंद ने कहानी की शुरुआत गधे से क्यों की?
उत्तर: लेखक ने गधे का उदाहरण ‘सीधेपन’ और ‘सहनशीलता’ को समझाने के लिए दिया है। वे बताते हैं कि अत्यधिक सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि गधे की सहनशीलता के कारण ही उसे बेवकूफ समझा जाता है।
